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पूर्व आर्मी चीफ विवाद पर सुखदेव भगत का हमला, केंद्र से पारदर्शिता की मांग

Lohardaga: पूर्व आर्मी चीफ जनरल एम.एम. नरवणे (रिटायर्ड) की कथित अनपब्लिश्ड किताब के सर्कुलेशन को लेकर देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे पर विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने-सामने हैं। इसी क्रम में लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुखदेव भगत

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Lohardaga: पूर्व आर्मी चीफ जनरल एम.एम. नरवणे (रिटायर्ड) की कथित अनपब्लिश्ड किताब के सर्कुलेशन को लेकर देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे पर विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने-सामने हैं। इसी क्रम में लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुखदेव भगत ने केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं।

सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि किसी किताब का प्रकाशित होना या न होना असली मुद्दा नहीं है। उनके अनुसार यदि राहुल गांधी द्वारा उठाई गई बातों पर पूर्व आर्मी चीफ ने कोई खंडन नहीं किया है, तो देश को सच्चाई जानने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि यह बहस किताब के प्रकाशन की नहीं, बल्कि उसमें उठाए गए तथ्यों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवालों की है।चीन के साथ सीमा पर बने हालात का उल्लेख करते हुए सांसद भगत ने कहा कि देश जानना चाहता है कि उस समय सरकार का रुख क्या था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्या स्टैंड लिया। उन्होंने कहा कि सीमाओं की सुरक्षा और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े मुद्दों पर पारदर्शिता जरूरी है।

लोकतंत्र में जनता को जानकारी देना सरकार की जिम्मेदारी है, न कि सवालों को दबाना। सुखदेव भगत ने अपने बयान में यह भी कहा कि वर्तमान सरकार सवालों से नहीं, बल्कि सवाल पूछने वालों से डरती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो भी व्यक्ति या दल सरकार से जवाब मांगता है, उसे अलग-थलग करने या बदनाम करने की कोशिश की जाती है। उनके मुताबिक, राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी स्वस्थ लोकतांत्रिक बहस होनी चाहिए।

इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। जहां विपक्ष इसे पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे राजनीतिक बयानबाजी करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने की संभावना है, खासकर यदि इस पर पूर्व आर्मी चीफ या केंद्र सरकार की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने आती है। लोहरदगा में भी सांसद के इस बयान के बाद सियासी हलचल बढ़ गई है और राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर तीखी चर्चा जारी है।

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