World News: पाकिस्तान के अंदरूनी राजनीतिक और सैन्य घटनाक्रमों के बीच, सिंध प्रांत के एक प्रमुख राष्ट्रवादी नेता शफी बुरफत ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। यह पत्र ऐसे समय में आया है जब शहबाज सरकार ने संविधान संशोधन कर पाकिस्तानी आर्मी चीफ असीम मुनीर को परमाणु हथियारों का एकाधिकार (Chief of Defence Forces) सौंप दिया है।

‘हम जिंदा रहना चाहते हैं’: पाक आर्मी चीफ को न्यूक्लियर पॉवर मिलते ही मचा हड़कंप

सिंधी नेशनलिस्ट ग्रुप ‘जेय सिंध मुत्ताहिदा महाज’ के चेयरमैन शफी बुरफत ने अपने पत्र में चेतावनी दी है कि पाकिस्तान अब एक “खतरनाक रूप से अस्थिर, चरमपंथी और सैन्य कमांड स्ट्रक्चर” की ओर बढ़ रहा है। उनका साफ कहना है कि असीम मुनीर को परमाणु बमों का मालिक बनाना न सिर्फ सिंध प्रांत, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक गंभीर खतरा है।

यह राजनीतिक बयान नहीं, इंसानियत के लिए एक ‘अलार्म’

मानवाधिकार दिवस से ठीक एक दिन पहले लिखा गया यह पत्र पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के गैर-जिम्मेदार रवैये को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करता है। बुरफत ने स्पष्ट किया है कि यह पत्र महज एक राजनीतिक बयान नहीं है, बल्कि “इंसानियत के लिए एक अलार्म” है।

पत्र में आगे लिखा गया है कि सिंध एक दमनकारी, कट्टर और खतरनाक देश में जिंदा रहने के लिए संघर्ष कर रहा है। पाकिस्तानी संसद द्वारा असीम मुनीर को राष्ट्रीय नीति, आंतरिक सुरक्षा और राजनीति पर पूर्ण नियंत्रण सौंपने के बाद, सिंधी नेता ने आशंका जताई है कि अब स्थिति और भी बिगड़ सकती है।

मोदी साहब, आपकी लीडरशिप लाखों की जान बचा सकती है

सिंधी नेता ने पीएम मोदी से भावुक अपील करते हुए लिखा है, “हम जिंदा रहना चाहते हैं। हम इज्जत चाहते हैं। हम एक ऐसे कट्टरपंथी, मिलिट्री वाले देश से आजादी चाहते हैं, जो हमारे देश को दबाता है और दुनिया को खतरे में डालता है।”

पत्र के अंत में उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी की लीडरशिप लाखों बेगुनाह लोगों की जान बचा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि सिंधी देश पाकिस्तानी गुलामी को पूरी तरह से खारिज करता है। उनका कहना है कि सभ्य दुनिया को इस खतरनाक सिस्टम का सामना करना होगा और उसे खत्म करना होगा। जब तक पाकिस्तान का कट्टरपंथ, आतंकवाद और गैर-जिम्मेदार न्यूक्लियर रवैया खत्म नहीं हो जाता, तब तक उसका अस्तित्व इस इलाके और दुनिया की शांति के लिए खतरा बना रहेगा। उन्होंने भारत, जो न्याय और लोकतंत्र की धरती है, से दबे-कुचले देशों के साथ खड़े होने की अपील की है।

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