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क्या वाकई छोड़ देना चाहिए चीनी, दूध और गेहूं? जानें विशेषज्ञों की राय

अभिनेत्री राधिका मदान द्वारा चीनी, दूध और गेहूं छोड़ने के बाद यह बहस छिड़ गई है कि क्या हर व्यक्ति को इन खाद्य पदार्थों से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।

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New Delhi: बॉलीवुड अभिनेत्री राधिका मदान हाल ही में अपनी बदलती लाइफस्टाइल और डाइट को लेकर चर्चा में आई हैं। उन्होंने किसी कठिन डाइटिंग प्लान के बजाय घर के बने सादे भोजन और स्वस्थ खानपान को प्राथमिकता दी है। उन्होंने साझा किया कि वे अपनी दिनचर्या से रिफाइंड चीनी और दूध पूरी तरह हटा चुकी हैं, जबकि गेहूं का सेवन बेहद सीमित मात्रा में करती हैं। उनके इस बयान के बाद स्वास्थ्य और फिटनेस जगत में यह सवाल उठने लगा है कि क्या वाकई एक स्वस्थ जीवनशैली के लिए हर आम इंसान को चीनी, दूध और गेहूं का त्याग कर देना चाहिए?

चीनी का अत्यधिक सेवन नुकसानदेह, लेकिन संपूर्ण त्याग अनिवार्य नहीं

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, प्रोसेस्ड और रिफाइंड चीनी का अत्यधिक सेवन सेहत के लिए हानिकारक साबित होता है। मिठाइयों, कोल्ड ड्रिंक्स और पैकेज्ड फूड्स से शरीर में एम्प्टी कैलोरीज जाती हैं, जिससे वजन बढ़ना, दांतों की समस्या और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा तेजी से बढ़ता है। हालांकि, इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि हर व्यक्ति को प्राकृतिक मिठास या सीमित मात्रा में चीनी का उपयोग पूरी तरह बंद करना होगा। दैनिक आहार में एडेड शुगर (अतिरिक्त चीनी) की मात्रा को नियंत्रित रखना ही पर्याप्त माना जाता है।

दूध और हड्डियों का स्वास्थ्य: लैक्टोज इनटॉलरेंस वालों के लिए ही परहेज जरूरी

दूध भारतीय आहार में कैल्शियम, उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन और विटामिन बी-12 का एक प्रमुख स्रोत है, जो हड्डियों और मांसपेशियों की मजबूती के लिए अनिवार्य है। पोषण विशेषज्ञों का मानना है कि केवल वे लोग जिन्हें ‘लैक्टोज इनटॉलरेंस’ या दूध के प्रोटीन से एलर्जी की समस्या है, उन्हें ही इसके सेवन से पेट फूलने, गैस या अपच जैसी परेशानियां होती हैं। ऐसे लोगों को चिकित्सकीय परामर्श से दूध छोड़ना चाहिए और कैल्शियम के वैकल्पिक स्रोतों को चुनना चाहिए। सामान्य पाचन तंत्र वाले व्यक्तियों के लिए दूध नुकसानदायक नहीं होता।

गेहूं ऊर्जा का मुख्य आधार, सीलिएक रोग न हो तो बंद करने की जरूरत नहीं

गेहूं भारतीय भोजन की रीढ़ है, जो शरीर को आवश्यक कार्बोहाइड्रेट, ऊर्जा और आहारीय फाइबर प्रदान करता है। पोषण विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि जब तक किसी व्यक्ति को सीलिएक रोग (Celiac Disease) या ग्लूटेन सेंसिटिविटी की चिकित्सकीय पुष्टि न हो, तब तक गेहूं को भोजन से पूरी तरह हटाना जरूरी नहीं है। हालांकि, केवल गेहूं पर निर्भर रहने के बजाय आहार में विविधता लाने के लिए ज्वार, बाजरा और रागी जैसे मोटे अनाजों (Millets) को शामिल करना अधिक फायदेमंद साबित होता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी सेलिब्रिटी की डाइट को बिना सोचे-समझे अपनाने के बजाय अपने शरीर की मेडिकल स्थिति और पोषण की जरूरतों के अनुसार ही संतुलित भोजन चुनें।

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