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रांची: झारखंड की राजधानी में बुधवार को राजनीतिक सरगर्मियां उस वक्त तेज हो गईं जब भाजपा के प्रमुख नेता आदित्य विक्रम जायसवाल ने औपचारिक रूप से कांग्रेस में अपनी “घर वापसी” की घोषणा की। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक भव्य मिलन समारोह में आदित्य जायसवाल के साथ-साथ झारखंड जनतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के जवाहरलाल यादव और वीरेंद्र विक्रम ने भी कांग्रेस का दामन थाम लिया।

पुराना रिश्ता, नया संकल्प
आदित्य विक्रम जायसवाल का कांग्रेस से नाता बेहद पुराना है; उनका परिवार पांच पीढ़ियों से कांग्रेस की विचारधारा से जुड़ा रहा है। हालांकि, 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट वितरण और गठबंधन के समीकरणों के चलते उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी। अब प्रभारी के. राजू और प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश की उपस्थिति में उन्होंने फिर से “हाथ” का साथ थाम लिया है। इस अवसर पर के. राजू ने कहा, “आदित्य के आने से संगठन को नई जान मिलेगी। कांग्रेस सिद्धांतों की पार्टी है और जो लोग समाज के हर वर्ग का हित चाहते हैं, उनका यहाँ हमेशा स्वागत है।”
सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ एकजुटता
प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने नवागत सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि कांग्रेस देश में सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ एक मजबूत दीवार बनकर खड़ी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी के विचारों में आस्था रखने वाले लोगों का जुड़ना यह दर्शाता है कि जनता का भरोसा अब भी कांग्रेस की धर्मनिरपेक्ष नीतियों पर कायम है।
समर्थकों का भारी रेला
मिलन समारोह सिर्फ बड़े नेताओं तक सीमित नहीं था। आदित्य जायसवाल के साथ हीरालाल कुमार, सुमन कुमार, अजय कुमार, रवि, सोनू नायक सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं ने पार्टी की सदस्यता ली। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रांची और आसपास के क्षेत्रों में आदित्य जायसवाल की पकड़ कांग्रेस के लिए आगामी नगर निकाय चुनावों और सांगठनिक विस्तार में फायदेमंद साबित हो सकती है।

