Saran: बिहार में मखाना की खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है। मिथिलांचल और सीमांचल के बाद अब सारण जिले में भी मखाना की खेती की शुरुआत हो गई है। जलालपुर प्रखंड में प्रगतिशील किसान अजीत भारती ने 25 एकड़ भूमि पर मखाना की खेती शुरू की है। कृषि विभाग का कहना है कि जिले के अन्य किसानों को भी प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग देकर इस खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
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सारण में मखाना की खेती कैसे शुरू हुई?
जिला कृषि पदाधिकारी मधुरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि बिहार सरकार के प्रयासों से मखाना को वैश्विक पहचान मिलने के बाद अब सारण के किसान भी इसकी खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिले में अब तक मुख्य रूप से गेहूं और धान की खेती होती रही है, लेकिन अब मखाना की खेती भी शुरू हो चुकी है। इसके लिए विभाग किसानों को प्रशिक्षण देने की योजना बना रहा है।
किसानों को क्या मिलेगा फायदा?
कृषि विभाग के अनुसार, मखाना की खेती से किसानों की आय बढ़ाने की संभावना है। इसके साथ ही जिले में पान, मौसमी, गेंदा फूल और मशरूम की खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि किसान पारंपरिक खेती के साथ अन्य फसलों को भी अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकें।
किसान अजीत भारती ने क्या कहा?
मांझी प्रखंड के किसान अजीत भारती ने बताया कि वे कई वर्षों से कटिहार में मखाना की खेती कर रहे हैं। कृषि विभाग के मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग से उन्हें हर वर्ष अच्छी गुणवत्ता की पैदावार मिल रही है। अब उन्होंने अपने पैतृक जिले सारण में 25 एकड़ भूमि पर मखाना की खेती शुरू की है। उन्होंने बताया कि शुरुआती चरण में फसल अच्छी स्थिति में है और अनुदान के लिए आवेदन भी जमा कराया गया है।
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वैश्विक बाजार में बढ़ रही मखाना की पहचान
बिहार का मखाना अब देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पहचान बना रहा है। राज्य से यूरोप सहित कई देशों में मखाना की मांग बढ़ रही है। दरभंगा क्षेत्र से 7 मीट्रिक टन मखाना कनाडा निर्यात किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि “लोकल से ग्लोबल” की सोच के तहत किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।




