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परमाणु हमले का अलर्ट बजा तो मची खलबली, बाद में खुली साइबर अटैक की पोल

रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान दोनों देशों के आधिकारिक आपातकालीन ऐप्स पर हुए साइबर हमलों, फर्जी परमाणु चेतावनी संदेशों और अधिकारियों की प्रतिक्रिया की विस्तृत जानकारी।

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Moscow: रूस-यूक्रेन युद्ध अब साइबर दुनिया में भी एक नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। हाल ही में दोनों देशों के आपातकालीन चेतावनी सिस्टम पर साइबर हमला हुआ, जिसके बाद नागरिकों के मोबाइल फोन पर परमाणु हमले और रेडिएशन के खतरे से जुड़े फर्जी संदेश भेजे गए। इस घटना से आम लोगों के बीच भ्रम और चिंता का माहौल पैदा हो गया, हालांकि संबंधित अधिकारियों ने तुरंत स्थिति स्पष्ट करते हुए साफ किया कि परमाणु हमले या रेडिएशन से जुड़ा कोई भी असल खतरा नहीं है।

यूक्रेन में एयर अलर्ट ऐप के जरिए भेजे गए फर्जी संदेश

गत 1 नवंबर की रात को यूक्रेन की राजधानी कीव समेत कई प्रमुख इलाकों में लोगों के मोबाइल फोन पर अचानक असामान्य अलर्ट आने लगे। ये अलर्ट यूक्रेन के आधिकारिक ‘एयर अलर्ट ऐप’ के माध्यम से भेजे गए थे, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर रूस की ओर से होने वाले मिसाइल और ड्रोन हमलों की चेतावनी देने के लिए किया जाता है। इस बार लोगों को रेडिएशन के खतरे, केमिकल अटैक की आशंका और रूस की ओरेश्निक (Oreshnik) हाइपरसोनिक मिसाइल से परमाणु हमले की चेतावनी से जुड़े फर्जी संदेश प्राप्त हुए। ‘ओरेश्निक’ रूस की एक ऐसी बैलिस्टिक मिसाइल है, जो परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है, जिसके कारण इन संदेशों ने लोगों की चिंता को और अधिक बढ़ा दिया।

इस मामले में यूक्रेन की वायुसेना ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए लोगों को सूचित किया कि ऐप के साथ दुश्मन की ओर से छेड़छाड़ की आशंका है और रेडिएशन का कोई वास्तविक खतरा नहीं है। आपको बता दें कि इस ऐप को साल 2022 में रूस के हमले के बाद लॉन्च किया गया था और इसकी यह विशेषता है कि मोबाइल साइलेंट मोड पर होने के बावजूद भी यह अलर्ट दे सकता है। जनवरी 2026 तक इस ऐप के लगभग 66 लाख एक्टिव यूजर्स दर्ज किए गए थे।

रूस के इमरजेंसी ऐप पर भी हुआ साइबर हमला

यूक्रेन में हुए इस साइबर हमले के कुछ ही घंटों बाद, रूस के इमरजेंसी सिचुएशंस मंत्रालय के मोबाइल ऐप को भी निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आईं। रूस में भी अज्ञात हैकर्स ने लोगों को परमाणु हमले से जुड़े फेक मैसेज भेजे। इन संदेशों में दावा किया गया कि रूस के सभी क्षेत्रों की ओर परमाणु हथियारों से लैस मिसाइलें लॉन्च कर दी गई हैं, और नागरिकों को सलाह दी गई कि वे तीन सप्ताह तक का भोजन जमा कर लें और बेसमेंट में पनाह लें।

हैकिंग समूहों की भूमिका और तकनीकी पहलू

यूक्रेन समर्थक हैकिंग समूह ‘अतेश’ (Atesh) ने रूस के ऐप पर हुए इस हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। जानकारों के अनुसार, हैकर्स ने संभवतः एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) के जरिए सिस्टम तक अपनी पहुंच बनाई थी। हालांकि, इस पूरे हमले के पीछे असल में किसका हाथ था, इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हो पाई है। रूस और यूक्रेन दोनों देशों ने एक-दूसरे से जुड़े हैकर समूहों पर इन गतिविधियों का आरोप लगाया है। यह घटना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि आधुनिक युद्ध अब केवल सीमा पर चलने वाली मिसाइलों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि डिजिटल सिस्टम और साइबर हमले भी युद्ध के अहम हथियार बनते जा रहे हैं।

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