Bihar News: बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में हैं। वक्फ संपत्तियों को लेकर उनके द्वारा संसद में पारित कानून को “कूड़ेदान में फेंकने” की बात कहने पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीखा हमला बोला है। भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने मंगलवार को पार्टी मुख्यालय में प्रेस वार्ता कर RJD और तेजस्वी यादव पर सीधे निशाना साधा।
शरिया कानून की चाहत?
गौरव भाटिया ने कहा कि RJD और तेजस्वी यादव अब समाजवादी नहीं, बल्कि “नमाजवादी” बन चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि RJD तुष्टिकरण की राजनीति में डूबी हुई है और अब देश में शरिया कानून लागू करने की मंशा रखती है। उन्होंने कहा, “क्या तेजस्वी यादव और RJD अब भारतीय संविधान के बजाय शरीया कानून के समर्थक हो गए हैं? क्या ये बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान को नहीं मानते?”
वक्फ संशोधन कानून को लेकर बयान
भाटिया ने कहा कि वक्फ बोर्ड को लेकर संसद में पारित कानून को तेजस्वी यादव ने कूड़ेदान में फेंकने की बात कही है, जो सीधे तौर पर संविधान और लोकतंत्र का अपमान है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या तेजस्वी यादव ने कभी संविधान की मूल भावना को समझने की कोशिश की है? “अगर ये लोग विपक्ष में रहते हुए संविधान और कानून को नकार रहे हैं, तो सत्ता में आने पर क्या करेंगे?” — भाटिया ने पूछा।
तुष्टिकरण और सांप्रदायिकता का आरोप
भाजपा प्रवक्ता ने RJD पर तुष्टिकरण और सांप्रदायिक राजनीति करने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि तेजस्वी और लालू यादव का शासन काल ‘जंगलराज’ का प्रतीक रहा है। उन्होंने कहा, “जो लोग कानून की जगह मजहबी भावनाओं को प्राथमिकता देते हैं, वे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा हैं।”
एनडीए नहीं होने देगा जहरीली सोच सफल
भाटिया ने कहा कि भाजपा और एनडीए के सभी घटक दल मिलकर RJD की इस ‘जहरीली सोच’ के खिलाफ संघर्ष करेंगे। उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र और संविधान को बचाए रखने के लिए देशवासियों को ऐसे नेताओं को जवाब देना चाहिए जो धार्मिक तुष्टिकरण के नाम पर सामाजिक एकता को नुकसान पहुंचाते हैं।
बिहार में फिर गरमाएगा सियासी पारा
तेजस्वी यादव के इस बयान से बिहार की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट आ गई है। चुनावी साल में इस तरह के मुद्दे राजनीतिक दलों के लिए संवेदनशील हो जाते हैं और दोनों ओर से बयानबाजी तेज हो जाती है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गहराने की संभावना है, खासकर तब जब विपक्षी दलों की एकता और रणनीति पर भी भाजपा की नज़र बनी हुई है।



