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रिम्स शिशु विभाग की लापरवाही उजागर : बच्चों के वजन में 2.5 किलो की गड़बड़ी से खतरे में इलाज

Ranchi : झारखंड का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) एक बार फिर लापरवाही को लेकर सवालों के घेरे में है। बच्चों के बेहतर इलाज का दावा करने वाला यह संस्थान इन दिनों शिशु विभाग में गंभीर चूक कर रहा है,

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Ranchi : झारखंड का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) एक बार फिर लापरवाही को लेकर सवालों के घेरे में है। बच्चों के बेहतर इलाज का दावा करने वाला यह संस्थान इन दिनों शिशु विभाग में गंभीर चूक कर रहा है, जिससे छोटे मरीजों की जान पर खतरा मंडरा रहा है।

मामला रिम्स के शिशु रोग विभाग (पीडियाट्रिक्स) का है, जहां बच्चों का वजन मापने में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। जानकारी के अनुसार, इलाज से पहले बच्चे का वजन गलत दर्ज किया जा रहा है, वास्तविक वजन से करीब 2.5 किलो कम बताया जा रहा है। यह लापरवाही तब उजागर हुई जब एक बच्चे के परिजन ने रिम्स के इलाज से असंतुष्ट होकर निजी अस्पताल का रुख किया।

परिजनों के मुताबिक, रिम्स में बच्चे का वजन 7.5 किलो बताया गया था, जबकि निजी अस्पताल में जांच कराने पर उसका वजन 10 किलो निकला। ऐसे में सवाल उठता है कि इतने बड़े अस्पताल में बुनियादी जांच भी सही तरीके से क्यों नहीं की जा रही।

गौरतलब है कि बच्चों की दवा की खुराक (डोज) उनके वजन के आधार पर तय की जाती है। यानी वजन गलत होने पर दवा की मात्रा भी गलत दी जाती है, जो छोटे बच्चों के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे के वजन में इस तरह की गलती इलाज की प्रभावशीलता को सीधे प्रभावित करती है, जिससे कभी-कभी जीवन पर भी खतरा बढ़ जाता है। रिम्स प्रशासन इस तरह की लापरवाही पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाया है।

लोगों का आरोप है कि रिम्स का प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग सुधार के नाम पर केवल दिखावा कर रहे हैं। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी लगातार यह दावा करते नजर आते हैं कि रिम्स में सेवा और व्यवस्था को लेकर सुधार किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कह रही है।

परिजनों ने कहा कि ऐसे मामलों में स्वास्थ्य विभाग को तुरंत संज्ञान लेकर जांच करनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी बच्चे के साथ ऐसा न हो। राज्य का यह एकमात्र प्रमुख चिकित्सा संस्थान है, जहां हजारों मरीज रोजाना इलाज के लिए पहुंचते हैं। लेकिन, अगर ऐसे ही लापरवाहीपूर्ण रवैये जारी रहे, तो रिम्स की साख और मरीजों का भरोसा दोनों ही खत्म होते दिख रहे हैं।

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