Ranchi News: राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) ने वर्ष 2025 में स्वास्थ्य सेवाओं, अधोसंरचना, शिक्षा और प्रशासनिक सुधार के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। रांची स्थित इस प्रमुख चिकित्सा संस्थान ने राज्यवासियों को बेहतर और सुलभ इलाज उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है।

RIMS के निदेशक प्रो. डॉ. राज कुमार ने बताया कि वर्ष 2025 का मुख्य फोकस आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज देने पर रहा। इसी क्रम में रेडियोलॉजी विभाग में अत्याधुनिक 3 टेस्ला एमआरआई मशीन की स्थापना की गई, जिससे जांच सेवाएं और अधिक सटीक हुई हैं।

इसके अलावा क्षेत्रीय नेत्र संस्थान भवन का निर्माण पूरा किया गया है। ऑन्कोलॉजी भवन में 70 बेड की क्षमता बढ़ाई गई, वहीं न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी के लिए नए वार्ड भी तैयार किए गए। मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 24×7 पैथोलॉजिकल जांच के लिए सेंट्रल लैब की शुरुआत की गई है।

छात्रों के लिए 500 बेड का नया छात्रावास भवन, बीएसएल-3 लैब, नया कैंटीन भवन और महिला चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ व दिव्यांगों के लिए ई-कार्ट जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 1136 सीसीटीवी कैमरे लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। साथ ही 103 नए पदों का सृजन कर कर्मचारियों को पदोन्नति और सेवा लाभ दिए गए हैं। RIMS परिसर में अतिक्रमित भूमि को मुक्त कर चहारदीवारी निर्माण का कार्य भी शुरू हो चुका है।

2026 में नई योजनाओं पर फोकस

डॉ. राज कुमार ने बताया कि वर्ष 2026 में RIMS को और अधिक उन्नत बनाने के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं प्रस्तावित हैं। इनमें ट्रॉमा सेंटर का विस्तार, नए आईसीयू और ओटी भवनों का निर्माण तथा कैंसर मरीजों के लिए लिनैक मशीन की स्थापना शामिल है।

इसके साथ ही हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड के संचालन से दवाओं और सर्जिकल सामग्री की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। एमबीबीएस, पीजी, नर्सिंग और सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों में सीट बढ़ाने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। फायर फाइटिंग सिस्टम और गैस पाइपलाइन जैसी सुरक्षा व्यवस्थाओं को भी और मजबूत किया जाएगा।

डॉ. राज कुमार ने कहा कि RIMS राज्य सरकार और हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप पारदर्शिता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य कर रहा है। लक्ष्य है कि RIMS को पूर्वी भारत का अग्रणी चिकित्सा संस्थान बनाया जाए।

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