Ranchi: लंबे समय से विवादों और तीखी राजनीतिक बयानबाजी के केंद्र में रही बहुप्रतीक्षित ‘रिम्स-2’ (RIMS-2) परियोजना का निर्माण कार्य आखिरकार गुरूवार से शुरू हो गया है। रांची के कांके क्षेत्र अंतर्गत नगड़ी में प्रस्तावित इस अत्याधुनिक अस्पताल के लिए जिला प्रशासन ने भारी सुरक्षा व्यवस्था और कड़े पहरे के बीच जमीन पर काम शुरू कराया।

इस दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण का पुरजोर विरोध किया, लेकिन मौके पर मौजूद भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मुस्तैदी के कारण जेसीबी (JCB) मशीनों ने काम को आगे बढ़ाया। किसी भी संभावित हिंसक टकराव या अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुबह से ही पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। कांके अंचलाधिकारी (CO) और वरिष्ठ पुलिस पदाधिकारी लगातार मोर्चा संभाले हुए हैं और प्रदर्शनकारी ग्रामीणों से संवाद कर उन्हें शांत कराने का प्रयास कर रहे हैं।

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ग्रामीणों का दावा: उपजाऊ और कृषि योग्य भूमि पर हो रहा कब्जा

गौरतलब है कि रिम्स-2 परियोजना को लेकर पिछले कई महीनों से नगड़ी और आसपास के इलाकों में गतिरोध जारी है। स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी परिवारों का स्पष्ट आरोप है कि जिस चिन्हित भूखंड पर अस्पताल का ढांचा खड़ा किया जा रहा है, वह उनकी पुश्तैनी और बेहद उपजाऊ कृषि योग्य भूमि है।

ग्रामीणों का तर्क है कि यह जमीन ही उनकी आजीविका और भरण-पोषण का एकमात्र मुख्य स्रोत है। आंदोलनरत ग्रामीणों ने साफ किया है कि वे राज्य के विकास या अस्पताल निर्माण के विरोधी नहीं हैं, बल्कि उनकी मांग है कि इस वृहद परियोजना को कृषि भूमि के बजाय किसी अन्य बंजर या गैर-कृषि सरकारी भूमि पर स्थानांतरित (शिफ्ट) किया जाना चाहिए। इस संवेदनशील जमीन विवाद को लेकर पूर्व में भी कई बार उग्र धरना-प्रदर्शन और राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप हो चुके हैं।

1000 करोड़ की लागत से बनेगा अत्याधुनिक सुपर स्पेशियलिटी हब

दूसरी ओर, राज्य सरकार और झारखंड स्वास्थ्य विभाग का तर्क है कि रिम्स-2 का निर्माण सूबे की चिकित्सा और स्वास्थ्य व्यवस्था को एक नई और आधुनिक दिशा देगा। करीब ₹1,000 करोड़ से अधिक की भारी-भरकम लागत वाली इस महापरियोजना के तहत एक विश्वस्तरीय अत्याधुनिक अस्पताल, चिकित्सा शिक्षा अनुसंधान केंद्र और सुपर स्पेशियलिटी (Super Specialty) सुविधाएं विकसित की जानी हैं।

सरकार का मानना है कि इस अस्पताल के चालू होने से झारखंड के गरीब और गंभीर मरीजों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा और स्थानीय स्तर पर ही बेहतर स्वास्थ्य लाभ मिल सकेगा। फिलहाल, निर्माण कार्य की शुरुआत के साथ ही ग्रामीणों और जिला प्रशासन के बीच एक बार फिर सीधे टकराव की स्थिति बन गई है। जहां प्रशासन संवाद के जरिए बीच का रास्ता निकालने का दावा कर रहा है, वहीं ग्रामीण अपनी जमीन बचाने की मांग पर पूरी तरह अड़े हुए हैं।

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