Adityapur News: सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) के 15वें दीक्षांत समारोह में सोमवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने छात्रों को सफलता और समाजिक जिम्मेदारी का सन्देश दिया। उन्होंने कहा कि ऊंचे पद पर पहुंचना सफलता की गारंटी नहीं है, बल्कि जब आपके ज्ञान और कार्य से आम जनता की जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आए, तभी सफलता का वास्तविक मूल्य समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि NIT से डिग्री प्राप्त करने के बाद कई चुनौतियां छात्रों का इंतजार कर रही हैं, लेकिन धैर्य और सतत प्रयास से इनका सामना करना ही सच्ची सफलता है।
“ऊंचा पद नहीं, जनता की जिंदगी में बदलाव ही असली सफलता”- NIT आदित्यपुर दीक्षांत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने छात्रों को दी मार्गदर्शक सीख
तकनीक का उपयोग मानव कल्याण के लिए करें
इस खबर को भी पढ़ें : राज्यपाल का बड़ा बयान: ओलचिकी सिर्फ लिपि नहीं, संताली समाज की धड़कन है!
राष्ट्रपति ने छात्रों को ‘नेशन बिल्डर्स’ की संज्ञा देते हुए कहा कि शिक्षण संस्थान केवल डिग्री देने की जगह नहीं हैं, बल्कि यह भविष्य की सोच को आकार देने वाली बौद्धिक प्रयोगशालाएं हैं। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग देशहित में करें और तकनीकी विकास को मानव कल्याण का माध्यम बनाएं। राष्ट्रपति ने कहा कि NIT में शिक्षा और नवाचार को समाज की जरूरतों से जोड़ने के लिए प्रभावशाली सिस्टम विकसित किया गया है, जिसमें सेंटर फॉर इनोवेशन और स्टार्टअप इकोसिस्टम भी शामिल हैं। उन्होंने तकनीक के दुरुपयोग, जैसे साइबर ठगी, की ओर भी ध्यान दिलाया और उम्मीद जताई कि NIT इसके समाधान पेश करेगा।
छात्रों की चुप्पी पर राष्ट्रपति की चुटकी
समारोह के दौरान एक क्षण तब आया जब राष्ट्रपति ने छात्रों की तालियों की कमी पर चुटकी ली। उन्होंने मुस्कराते हुए कहा कि छात्रों को उत्साह दिखाते हुए तालियां बजानी चाहिए। छात्रों ने बाद में जोर-शोर से तालियां बजाकर माहौल को जीवंत किया। राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को अपने माता-पिता और शिक्षकों के प्रति कृतज्ञ रहने की सीख दी। उन्होंने विशेष रूप से मानद उपाधि प्राप्त करने वाले स्वामी गोविंद देव गिरी (डॉक्टर ऑफ लिटरेचर) और उद्योगपति रवींद्र कुमार बेहरा (डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी) को बधाई दी।
इस खबर को भी पढ़ें : करनडीह में गूंजा ‘जोहार’: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संताली गीत गाकर जीता सबका दिल!
राष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी संस्थान की रैंकिंग केवल छात्रों की सफलता या प्लेसमेंट से नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह देखा जाना चाहिए कि उसके छात्र देश के विकास में कितना योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना केवल ऊंची इमारतों और मजबूत अर्थव्यवस्था से पूरा नहीं होगा, बल्कि तब साकार होगा जब समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी गरिमापूर्ण जीवन जीने का अवसर मिले।
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने डिग्री और पदक प्राप्त छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन नई जिम्मेदारियों की शुरुआत का दिन है। उन्होंने जमशेदजी नुसेरवानजी टाटा और रतन टाटा की भी स्मृति दिलाई और कहा कि उन्होंने औद्योगिक विकास के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और आम जनता की गरिमा को समान महत्व दिया। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे जहां भी काम करें, NIT और जमशेदपुर जी टाटा के मूल्यों को अपने आचरण में जीवित रखें।
मेधावी छात्रों को मिला स्वर्ण पदक
समारोह में झारखंड के मंत्री दीपक बिरुवा, NIT के निदेशक डॉ. राजेश्वर मिश्रा, शिक्षाविद डॉ. अंशु कुमार, प्रशासनिक अधिकारी और कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए एम.एससी. (भौतिकी) के कृष्णाशिष मंडल (9.64 CGPA) और बी.टेक (इलेक्ट्रिकल) के प्रियांशु राज (9.52 CGPA) को राष्ट्रपति के हाथों गोल्ड मेडल प्रदान किया गया। समारोह में कुल 1,114 छात्रों को डिग्रियां दी गईं, जिनमें 417 स्नातक, 149 स्नातकोत्तर और 46 पीएचडी शोध छात्र शामिल थे। राष्ट्रपति ने छात्रों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग देश की सेवा में करें और अपने जीवन को केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित न रखें।
इस खबर को भी पढ़ें : धालभूम बना ‘नो-फ्लाइंग जोन’; राष्ट्रपति के स्वागत में जमशेदपुर तैयार



