Chatra News: झारखंड के चतरा जिले का प्रतापपुर प्रखंड इन दिनों भ्रष्टाचार का ‘एपिसेंटर’ बन चुका है। डूमरवार के बाद अब भरही पंचायत में मनरेगा महा-घोटाले की एक ऐसी परत खुली है जिसने जिला प्रशासन की नींद उड़ा दी है। यहां का सिस्टम इस कदर सड़ चुका है कि जो मजदूर महीनों पहले पेट पालने के लिए दिल्ली, पंजाब और हरियाणा जा चुके हैं, उनके नाम पर प्रखंड के अधिकारी और ऑपरेटर ‘फर्जी डिमांड’ का खूनी खेल खेल रहे हैं। धरातल पर मजदूरों के फावड़े नहीं, बल्कि रात के अंधेरे में JCB के पंजे चल रहे हैं और निवाला मजदूरों के बजाय बिचौलियों की जेब में जा रहा है।

मजदूर महानगरों में और हाजिरी भरही में; डिजिटल लूट का मास्टर प्लान

शिकायतकर्ता रामदेव यादव ने उपायुक्त को सौंपे आवेदन में इस घोटाले की पूरी कुंडली खोलकर रख दी है। नवंबर 2025 से अब तक का रिकॉर्ड देखें तो उन मजदूरों के नाम पर मास्टर रोल भरे गए हैं जो गांव में हैं ही नहीं। ताज्जुब की बात यह है कि शिकायतों के अंबार के बावजूद प्रखंड प्रशासन मौन साधे बैठा है। शिकायतकर्ता ने साक्ष्य के तौर पर जो वीडियो और फोटो सौंपे हैं, उनमें साफ दिख रहा है कि तालाबों की खुदाई मशीनों से की गई है, जबकि कागजों पर इसे मजदूरों का पसीना बताया गया है।

जेई की जांच पर सवाल: 14 में से केवल 2 योजनाओं पर ही क्यों गिरी गाज?

इस पूरे खेल में तकनीकी सहायक (JE) की भूमिका भी कटघरे में है। ग्रामीणों ने कुल 14 तालाबों और डोभा निर्माण (वर्क कोड सहित) में धांधली की लिस्ट दी थी, लेकिन जेई रूपेश ने बड़ी चालाकी से केवल दो योजनाओं (रवि कुमार और रीता देवी) को ‘जीरो’ करके अपना पल्ला झाड़ लिया। सवाल उठता है कि अगर उन दो योजनाओं में गड़बड़ी थी, तो बाकी 12 को ‘क्लीन चिट’ किस आधार पर दी गई? क्या यह मुखिया पति और अधिकारियों के बीच ‘लीपापोती’ की कोई गुप्त डील है?

DDC का ‘एक्शन’ मोड: “अब बर्दाश्त से बाहर है प्रतापपुर का फर्जीवाड़ा”

प्रतापपुर की इस निरंतर लूट से अब जिला प्रशासन का सब्र जवाब दे गया है। चतरा डीडीसी अमरेंद्र कुमार सिन्हा ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा, “मैं प्रतापपुर प्रखंड की शिकायतों से आजिज आ चुका हूँ। भरही मामले की जांच अब और तेज होगी। अगर गड़बड़ी की पुष्टि हुई, तो ऐसी कठोर कार्रवाई होगी कि दोबारा कोई सरकारी धन पर डाका डालने की जुर्रत नहीं करेगा।” अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह जांच असली गुनहगारों तक पहुँचेगी या फिर छोटे प्यादों को बलि का बकरा बनाकर इस ‘सिंडिकेट’ को बचा लिया जाएगा।

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