चैनपुर : सड़क निर्माण को भले ही विकास की पहचान माना जाता हो, लेकिन चैनपुर प्रखंड के मालम से कोल्हुकोना तक बन रही प्रधानमंत्री जन मन सड़क योजना के तहत सड़क स्थानीय लोगों के लिए वरदान के बजाय अब मुसीबत बन गई है। 4.6 किलोमीटर लंबी इस सड़क का निर्माण कार्य धीमी गति और कथित लापरवाही के कारण बरसात बीत जाने के बावजूद भी बदहाल स्थिति में है, जिससे कई गांवों के लोग भारी परेशानी झेल रहे हैं।

निर्माण कार्य में लापरवाही और धीमी गति

सड़क का निर्माण कार्य लाल कंस्ट्रक्शन द्वारा किया जा रहा है, लेकिन संवेदक और विभागीय अभियंताओं की कथित लापरवाही के कारण निर्माण की गति बेहद धीमी है। बरसात के मौसम में सड़क की हालत इतनी बदतर हो गई थी कि जगह-जगह कीचड़ भर जाने से पैदल चलना भी मुश्किल हो गया था। बरसात बीतने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। कतारीकोना, कोल्हूकोना, तिलवारी पाठ,गाड़ाटोली सहित कई गांवों के लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं।ग्रामीण मिट्टी युक्त बालू के प्रयोग से पुल निर्माण और पुल की प्लास्टरिंग किए जाने का सीधा आरोप संवेदक और अधिकारियों की मिलीभगत पर लगा रहे हैं।

स्वास्थ्य और शिक्षा पर गहरा असर

ग्रामीणों का कहना है कि खराब सड़क के कारण वे सरकार की कई योजनाओं से भी वंचित हो रहे हैं। चैनपुर मुख्यालय या जिला मुख्यालय तक पहुंचना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। मरीजों को सड़क मार्ग से ले जाना संभव नहीं है, जिसके कारण उन्हें पाँच किलोमीटर तक बहिंगा (कांवर) में ढोकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। स्कूली बच्चे बारिश में कीचड़ में सनकर स्कूल पहुंचते हैं, और कई बार अधिक बारिश होने पर स्कूल छूट जाता है। कतारिकोना के ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें बाजार या प्रखंड कार्यालय जाने के लिए 15 किलोमीटर पैदल चलकर मालम मेन रोड तक जाना पड़ता है। ग्रामीणों की व्यथा: ग्रामीण बीफे असुर, बंधन असुर, मनोज असुर ने बताया, “वर्षों से सड़क का इंतजार था, लेकिन अब निर्माण कार्य की धीमी गति और कीचड़ ने हालात बिगाड़ दिए हैं। बरसात बीत जाने के बावजूद भी वही हाल है।”

 

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीण लोटन असुर, प्रदीप असुर, असरिता असुर सहित कई लोगों ने विभाग से सड़क निर्माण कार्य में तेजी लाने और गुणवत्ता पर ध्यान देने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने यह भी अपील की है कि आवागमन को सुचारू बनाने और लोगों की परेशानी कम करने के लिए तत्काल एक वैकल्पिक रास्ता बनाया जाए।
एक ओर सरकार पुल-पुलिया बनाकर लोगों को प्रखंड तक जोड़ने का प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर संवेदक की मनमानी के कारण इन जनजातीय परिवारों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

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