Bokaro news: झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के केंद्रीय कोर कमिटी सदस्य सह बोकारो जिला अध्यक्ष राजदेव माहथा ने सोमवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बोकारो और चंदनकियारी के जनप्रतिनिधियों पर रैयतों, किसानों और झारखंड आंदोलनकारियों की समस्याओं की अनदेखी का आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 के बाद 8 दिसंबर 2024 को मोर्चा का एक प्रतिनिधिमंडल उनके नेतृत्व में बोकारो विधायक श्वेता सिंह और चंदनकियारी विधायक उमाकांत रजक से मिला था। प्रतिनिधिमंडल ने दोनों विधायकों को जीत की बधाई देते हुए दो महत्वपूर्ण मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपे थे।
पहले ज्ञापन में वर्ष 1982 में चास और चंदनकियारी प्रखंड में हुए भू-सर्वे एवं सेटलमेंट कार्य में हुई भारी त्रुटियों और विसंगतियों को दूर करने की मांग की गई थी। मोर्चा का कहना है कि करीब 44 वर्षों से यह मामला लंबित है, जिससे रैयतों और किसानों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
दूसरे ज्ञापन में झारखंड अलग राज्य आंदोलनकारियों की लंबित मांगों को उठाया गया था। इनमें आंदोलनकारियों को पहचान-पत्र, सम्मान पेंशन, आश्रितों को नियोजन, बेहतर स्वास्थ्य सुविधा तथा अन्य सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग शामिल थी।
राजदेव माहथा ने आरोप लगाया कि ज्ञापन सौंपे जाने के लगभग एक वर्ष सात माह बीत जाने के बावजूद दोनों जनप्रतिनिधियों ने इन मुद्दों को विधानसभा में प्रभावी ढंग से नहीं उठाया। इससे रैयतों, किसानों और आंदोलनकारियों में भारी नाराजगी है।
उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के उस चुनावी वादे का भी उल्लेख किया, जिसमें चंदनकियारी की चुनावी सभा में भू-सर्वे एवं सेटलमेंट की त्रुटियों को दूर करने का आश्वासन दिया गया था। उन्होंने कहा कि आज भी किसान, रैयत और आंदोलनकारी सरकार से उस वादे के पूरा होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
मोर्चा ने सरकार और जनप्रतिनिधियों से जल्द इन लंबित समस्याओं का समाधान करने तथा आंदोलनकारियों और किसानों के हितों की रक्षा के लिए ठोस पहल करने की मांग की है।
