Ranchi : झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान बुधवार को “अबुआ आवास योजना” को लेकर सदन में अहम चर्चा हुई। ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने जानकारी दी कि राज्य सरकार लाभुकों को आवास राशि दो किस्तों में देने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रही है, ताकि अधिक से अधिक पात्र परिवारों को समय पर आवास का लाभ मिल सके।

भाजपा विधायक शत्रुघ्न महतो के अल्पसूचित प्रश्न के जवाब में मंत्री ने बताया कि वर्तमान में राज्य को केंद्र सरकार से प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत केवल एक बार ही फंड प्राप्त हुआ है। इसके बाद कोई नई राशि जारी नहीं होने के कारण राज्य सरकार दूसरी किस्त जारी करने की स्थिति में नहीं है। यही कारण है कि हजारों लाभुकों के घर अधूरे रह गए हैं और कई लोगों को कड़ाके की ठंड के बीच मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

विधायक ने सदन में बताया कि बड़ी संख्या में लोगों को योजना की पहली किस्त मिल चुकी है, लेकिन दूसरी किश्त न मिलने से निर्माण कार्य बीच में ही रुक गया है। इससे गरीब और जरूरतमंद परिवारों को खुले आसमान के नीचे रातें बिताने को मजबूर होना पड़ रहा है।

मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने सदन को बताया कि सरकार को “अबुआ आवास योजना” के तहत लगभग 24 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं। सरकार ने इस योजना के लिए लगभग 3000 करोड़ रुपये की वित्तीय व्यवस्था की है, जिसमें से करीब 12 अरब रुपये जिलों को वितरित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि सभी पात्र लाभुकों को आवास मिले, लेकिन केंद्र से फंडिंग न मिलने की वजह से प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

इस दौरान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सुझाव दिया कि लाभुकों को आवास की राशि दो किस्तों में दी जाए, जिससे उनका घर समय पर पूरा हो सके। उन्होंने इंदिरा आवास योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले भी कई योजनाओं में किस्तों में भुगतान से जुड़ी शिकायतें आती रही हैं, लेकिन इसके माध्यम से काम को आगे बढ़ाया जा सकता है।

मंत्री ने सदन में आश्वासन दिया कि राज्य सरकार इस सुझाव पर गंभीरता से विचार करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि केंद्र सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना की सहायता राशि बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दे, तो गरीब और जरूरतमंद परिवारों को अधिक राहत मिल सकती है। सरकार और विपक्ष दोनों ने इस बात पर सहमति जताई कि जरूरतमंद लोगों को समय पर आवास उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

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