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रांची: राजधानी में महिला अधिवक्ता के साथ हुए दुर्व्यवहार का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। दिनांक 5 फरवरी 2026 को एसएसपी चौक के समीप एक महिला अधिवक्ता के साथ कथित रूप से अशोभनीय आचरण एवं बदसलूकी की गई, जिससे पूरे अधिवक्ता समाज में आक्रोश व्याप्त है। इस घटना को लेकर यंग लॉयर्स एसोसिएशन ने झारखंड के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर दोषी पुलिसकर्मियों पर कड़ी और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।
पत्र में कहा गया है कि पीड़ित महिला अधिवक्ता अपने पुत्र के साथ बदसलूकी से संबंधित शिकायत दर्ज कराने गई थीं, लेकिन वहां मौजूद पुलिसकर्मियों द्वारा उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया गया। घटना का वीडियो सामने आने और सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला सार्वजनिक हुआ, जिससे पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
एसोसिएशन ने यह भी उल्लेख किया है कि मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है तथा एक पुलिसकर्मी के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई भी की गई है, लेकिन अभी तक इस प्रकरण में शामिल सभी दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह आधी-अधूरी कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है और इससे महिला सुरक्षा एवं कानून के राज की अवधारणा को ठेस पहुंचती है।
यंग लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ए. के. चौबे ने कहा कि महिला अधिवक्ता न केवल एक नागरिक हैं, बल्कि न्याय व्यवस्था का अहम स्तंभ भी हैं। यदि उनके साथ ही इस प्रकार का व्यवहार किया जाएगा, तो आम जनता की सुरक्षा की कल्पना कैसे की जा सकती है। उन्होंने पुलिस महानिदेशक से व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और सभी दोषियों पर सख्त विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।
इस मामले की प्रतिलिपि वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची एवं झारखंड राज्य महिला आयोग को भी भेजी गई है, ताकि महिला अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके। अधिवक्ता संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलनात्मक कदम उठाने को विवश होंगे।
घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या महिलाएं, विशेषकर महिला अधिवक्ता, पुलिस थानों और सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षित हैं। अब सभी की निगाहें पुलिस प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

