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टीचर से प्रिंसिपल और अब सांसद तक का सफर, पिया डांडिया ने रचा इतिहास

अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में भारतवंशी पिया डांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें डिस्ट्रिक्ट से प्रतिनिधि सभा का चुनाव जीतकर एक बड़ी कामयाबी हासिल की है, जिससे अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के नेताओं का प्रभाव और मजबूत हुआ है।

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Washington: अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में भारतवंशियों का जलवा एक बार फिर बरकरार है। इसी कड़ी में, भारतीय मूल की पिया डांडिया ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार के तौर पर फ्लोरिडा के बाईसवें डिस्ट्रिक्ट (22nd District) से प्रतिनिधि सभा का चुनाव जीतकर एक ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी रिपब्लिकन नेता कैसी अस्कर को शिकस्त दी है।

खास बात यह है कि यह सीट डेमोक्रेट्स के लिए परंपरागत रूप से बेहद मुश्किल मानी जाती रही है। चुनाव आयोग द्वारा घोषित अंतिम नतीजों के अनुसार, पिया डांडिया को इक्यावन दशमलव नौ प्रतिशत यानी कुल एक लाख इकानवे हजार नौ सौ छब्बीस वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी और पूर्व सैनिक कैसी अस्कर को उनचास दशमलव एक प्रतिशत यानी एक लाख चालीस हजार नौ सौ तेरह वोट प्राप्त हुए।

शिक्षक से कॉर्पोरेट और फिर राजनीति का सफर

पिया डांडिया का जन्म पाम बीच काउंटी में हुआ था, हालांकि उनके माता-पिता बहुत पहले भारत से आकर अमेरिका में बस गए थे। उनके करियर की शुरुआत अट्ठाइस साल की उम्र में एक मिडिल स्कूल टीचर के तौर पर हुई थी, जिसके बाद वह हाई स्कूल की प्रिंसिपल बनीं। उन्हें अमेरिका में सबसे कम उम्र की प्रिंसिपल बनने वालों में शुमार किया जाता है। शिक्षा के क्षेत्र में अपनी लंबी सेवा के अलावा, उन्होंने निजी क्षेत्र में ऐपल (Apple) जैसी दिग्गज तकनीकी कंपनियों में भी कार्य किया है।

अपनी आधिकारिक चुनावी वेबसाइट पर पिया डांडिया ने कहा था कि वह अमेरिकी कांग्रेस में इसलिए उतरी हैं ताकि अपने छात्रों और अपने बेटे के एक उज्ज्वल भविष्य के लिए लड़ सकें। उन्होंने कांग्रेस में नेताओं की एक नई पीढ़ी की आवश्यकता पर जोर दिया, जो सक्रियता से कार्य करें और भविष्योन्मुखी कानूनों का निर्माण करें। डांडिया ने अपने मुख्य चुनावी एजेंडे में महंगाई के संकट से सीधे निपटने और आम अमेरिकी जनता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का वादा किया था। उन्होंने यह भी संकल्प लिया था कि वह कामकाजी परिवारों के पक्ष में चट्टान की तरह खड़ी रहेंगी तथा सोशल सिक्योरिटी, मेडिकेड और पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों को कमजोर नहीं होने देंगी।

अन्य भारतवंशी उम्मीदवारों पर भी टिकी हैं नजरें

इस मध्यावधि चुनाव में पिया डांडिया अकेली भारतीय मूल की चेहरा नहीं हैं; कई अन्य भारतवंशी उम्मीदवार भी मैदान में डटे हुए हैं, जो गवर्नर से लेकर सिटी काउंसिल सदस्यों तक के विभिन्न पदों के लिए अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें ओहायो से गवर्नर पद के लिए चुनाव लड़ रहे विवेक रामस्वामी एक बेहद चर्चित चेहरा हैं।

यदि रामस्वामी चुनाव जीत जाते हैं, तो वह लुइसियाना के पूर्व गवर्नर बॉबी जिंदल और साउथ कैरोलिना की पूर्व गवर्नर निक्की हेली के बाद अमेरिकी इतिहास में भारतीय मूल के तीसरे गवर्नर बन जाएंगे। इसके अलावा, प्रतिनिधि सभा के लिए डेमोक्रेटिक नेता के तौर पर अमीश शाह एरिजोना से चुनाव लड़ रहे हैं, जो पेशे से डॉक्टर हैं और उन्हें कांग्रेस से जुड़ी डेमोक्रेटिक प्रचार समिति का मजबूत समर्थन प्राप्त है। वहीं, एरिजोना से ही प्रिया सुंदरेश भी सीनेट के लिए अपनी दमदार दावेदारी पेश कर रही हैं।

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