Dumka News: झारखंड के शिकारीपाड़ा प्रखंड में सोमवार को उस वक्त तनाव फैल गया, जब एक ई-रिक्शा चालक की पिटाई से हुई मौत के विरोध में ग्रामीणों ने सड़क जाम कर दिया। गुस्साए लोगों ने मृतक का शव एनएच‑114A पर रखकर आवागमन पूरी तरह ठप कर दिया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए और पीड़ित परिवार को मुआवजा दिया जाए।

मिली जानकारी के अनुसार यह मामला जमीन विवाद से जुड़ा है। दुमका जिले के शिकारीपाड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत शिमला ढाका गांव में दो पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। रविवार को एक पक्ष थाना जा रहा था और उसने ई-रिक्शा चालक सफारुद्दीन मियां की गाड़ी ली थी। रास्ते में दूसरे पक्ष के लोगों ने रिक्शा रोक लिया और सवाल करने लगे कि वह विरोधी पक्ष को क्यों ले जा रहा है।

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इसी बात पर विवाद बढ़ गया। आरोप है कि दूसरे पक्ष के लोगों ने ई-रिक्शा चालक सफारुद्दीन की लात-घूंसों और लाठी से बेरहमी से पिटाई कर दी। गंभीर हालत में उसे पहले शिकारीपाड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से दुमका मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। बाद में उसे वर्धमान भेजा गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

सोमवार सुबह जैसे ही शव गांव पहुंचा, परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। शव को थाना से कुछ दूरी पर स्थित चौक पर रखकर सड़क जाम कर दिया गया। मृतक के रिश्तेदार मोइन अंसारी ने बताया कि सफारुद्दीन छह बेटियों का पिता था और अब परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

जाम के कारण दुमका-रामपुरहाट मार्ग पर यात्री और मालवाहक वाहनों की लंबी कतार लग गई। तारापीठ जाने वाले श्रद्धालु भी घंटों फंसे रहे। सूचना मिलने पर अमित लकड़ा मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाने की कोशिश की।

थाना प्रभारी ने बताया कि घटना के बाद छह नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इनमें से दो की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि बाकी की तलाश जारी है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि सभी आरोपियों को जल्द पकड़ा जाएगा और मृतक परिवार को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।

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