Lohardaga News: लोहरदगा में मंगलवार को झारखंड राज्य पेंशनर समाज की मासिक बैठक कुछ ज्यादा ही तनावपूर्ण रही। मंच पर आते ही अखिल भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के राष्ट्रीय सचिव और झारखंड इकाई के महासचिव महेश कुमार सिंह ने साफ शब्दों में कह दिया- “जिसने जिंदगी भर देश का विकास किया, उसे अब अधिकारों से वंचित करना सीधा अन्याय है।”

आठवें वेतन आयोग से बाहर रखने पर भड़के पेंशनर

महेश कुमार सिंह ने केंद्र सरकार के उस फैसले को ‘तुगलकी’ करार दिया, जिसमें 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए सभी गजेटेड और नन-गजेटेड कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग के पेंशनरी लाभ से बाहर रखने का प्रस्ताव है।

उन्होंने कहा कि यह फैसला न सिर्फ गैर-जरूरी है, बल्कि उन लाखों लोगों पर चोट है जिन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, तकनीकी और प्रशासनिक क्षेत्रों में दशकों तक सेवा दी है। उनका कहना था, “यह कटौती पेंशनरों के सम्मान को ठेस पहुंचाती है। अगर सरकार पीछे नहीं हटी, तो देशभर में विशाल आंदोलन होगा।”

17 दिसंबर को ‘पेंशनर मांग दिवस’ की घोषणा

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 17 दिसंबर 2025 को पूरे देश में “पेंशनर दिवस सह पेंशनर मांग दिवस” मनाया जाएगा। इस दौरान केंद्र सरकार के प्रस्ताव का कड़ा विरोध होगा और इसे तत्काल वापस लेने की मांग की जाएगी।

लोहरदगा के पेंशनर भवन में आयोजित बैठक की अध्यक्षता देवमनी कुमारी और मोहम्मद जफर आलम ने की। बैठक में भारी संख्या में पेंशनर पहुंचे और सभी ने एक सुर में कहा कि किसी भी हालत में अधिकारों में कटौती बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

‘जरूरत पड़ी तो सड़क पर उतरेंगे’ – पेंशनरों का संकल्प

बैठक में उपस्थित वरिष्ठ पेंशनरों- मंजू देवी, आशामनी लकड़ा, बीसनी उरांव, मोहम्मद जुमन अंसारी समेत दर्जनों लोगों ने साफ कहा कि यदि सरकार ने निर्णय वापस नहीं लिया, तो राष्ट्रव्यापी आंदोलन खड़ा किया जाएगा।

महेश कुमार सिंह ने कहा कि पेंशनरों की आवाज इस बार हल्की नहीं पड़ेगी- “यह सिर्फ वेतन आयोग का मुद्दा नहीं, यह सम्मान और अधिकार की लड़ाई है।”

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