Lifestyle Desk: पार्टनर का फोन चेक करना कई लोगों की आदत बन चुकी है, रिश्तों में भरोसा सबसे मजबूत आधार माना जाता है, लेकिन कई बार असुरक्षा, संदेह या पुराने अनुभव लोगों को अपने पार्टनर का फोन चेक करने के लिए प्रेरित कर देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि चोरी-छिपे पार्टनर की निजी बातचीत, कॉल रिकॉर्ड या सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखना रिश्ते में तनाव और अविश्वास बढ़ा सकता है।

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वरिष्ठ मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, पार्टनर का फोन चेक करने की इच्छा केवल शक की वजह से नहीं होती। इसके पीछे भावनात्मक असुरक्षा, आत्मविश्वास की कमी और रिश्ते को खोने का डर जैसे कई मनोवैज्ञानिक कारण भी हो सकते हैं।

किन वजहों से बढ़ता है शक?

विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि किसी रिश्ते में पहले झूठ बोला गया हो, बातें छिपाई गई हों या धोखा मिला हो, तो भरोसा कमजोर पड़ सकता है। ऐसे में व्यक्ति अपने संदेह को दूर करने के लिए बार-बार पार्टनर का फोन देखने की कोशिश करता है।

इसके अलावा, जलन और अधिकार जताने की भावना भी इस व्यवहार को बढ़ावा देती है। यदि पार्टनर अधिक मिलनसार हो, विपरीत लिंग के लोगों से ज्यादा बातचीत करता हो या सोशल मीडिया पर सक्रिय रहता हो, तो कुछ लोगों के मन में अनावश्यक संदेह पैदा होने लगता है।

संवाद और भरोसा ही है सबसे बेहतर उपाय

विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों को पहले के रिश्तों में धोखा मिला हो, वे नए रिश्तों में भी आसानी से भरोसा नहीं कर पाते। वहीं, यदि पार्टनर के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखे, जैसे फोन छिपाकर रखना, देर रात तक जागना या बातचीत में दूरी बनाना, तो संदेह बढ़ सकता है।

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डॉ. मोनिका शर्मा के अनुसार, आपसी सहमति से फोन साझा करना गलत नहीं है, लेकिन बिना अनुमति चोरी-छिपे फोन चेक करना रिश्ते के लिए नुकसानदायक हो सकता है। यदि बार-बार ऐसा करने की इच्छा हो रही है, तो जासूसी करने के बजाय अपने साथी से खुलकर बातचीत करना बेहतर विकल्प है। जरूरत पड़ने पर मनोवैज्ञानिक या काउंसलर की मदद भी ली जा सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी भी मजबूत और स्वस्थ रिश्ते की नींव विश्वास, पारदर्शिता और खुला संवाद होता है।

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