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Islamabad: आर्थिक बदहाली से जूझ रहा पाकिस्तान अपनी तिजोरी भरने के लिए अब बलूचिस्तान के संसाधनों का सौदा करने पर उतारू है। दुनिया की सबसे बड़ी तांबे और सोने की खदानों में शुमार ‘रेको डिक’ को लेकर शहबाज शरीफ सरकार और बलूच विद्रोहियों के बीच ठन गई है। कनाडाई और अमेरिकी निवेशकों के दबाव में आकर पाकिस्तानी हुकूमत ने अब बलूचों के खिलाफ आर-पार की जंग का मन बना लिया है।
विदेशी कंपनियों ने दी चेतावनी
कनाडा की दिग्गज कंपनी बैरिक माइनिंग कॉर्पोरेशन ने हाल ही में हुए हमलों के बाद पाकिस्तान को दो-टूक कह दिया है कि यदि सुरक्षा नहीं मिली, तो वे प्रोजेक्ट की समीक्षा करेंगे। दरअसल, बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने पिछले दिनों भीषण हमले कर पाकिस्तानी फौज और प्रशासन की कमर तोड़ दी है। निवेशकों को डर है कि उनका अरबों डॉलर का निवेश बलूचिस्तान की आग में स्वाहा न हो जाए।
ट्रंप प्रशासन का निवेश और पाकिस्तान की मजबूरी
पाकिस्तान के लिए ‘संजीवनी बूटी’ बना है ट्रंप प्रशासन का 1.3 अरब डॉलर का निवेश। डॉलर की इस बारिश को बचाने के लिए पाकिस्तान सरकार अब बलूचिस्तान में एक ‘स्पेशल फोर्स’ और नया इंटेलिजेंस नेटवर्क तैनात करने जा रही है। बलूचिस्तान के सीएम के सलाहकार शाहिद रिंद के मुताबिक, खनिज क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए फ्रंटियर कोर की नई टुकड़ियां बनेंगी और सीमाओं पर पहरा सख्त होगा।
संसाधनों की लूट या विकास?
रेको डिक प्रोजेक्ट में 50 फीसदी हिस्सेदारी बैरिक गोल्ड की है। पाकिस्तान को उम्मीद है कि 2028 तक यहां से सोना निकलने लगेगा, जिससे उसकी किस्मत बदल जाएगी। वहीं, बलूच समुदाय इसे अपनी मातृभूमि की लूट मानता है। बीएलए ने साफ कर दिया है कि वे अपनी जमीन के संसाधनों को विदेशियों के हाथ बिकने नहीं देंगे, चाहे इसके लिए उन्हें पाकिस्तानी सेना के बेस पर ही हमला क्यों न करना पड़े।
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