Islamabad: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत को लेकर एक बार फिर सनसनी फैल गई है। सोमवार को उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच रावलपिंडी की अधियाला जेल से निकालकर इस्लामाबाद के ‘पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज’ (PIMS) अस्पताल लाया गया। अस्पताल के गलियारों में उस वक्त हलचल बढ़ गई जब डॉक्टरों की एक विशेष टीम ने खान की दाहिनी आंख की जांच की और उन्हें एक जरूरी इंजेक्शन लगाया।

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अस्पताल प्रशासन ने इस दौरे को एक ‘फॉलो-अप चेकअप’ बताया है। मेडिकल रिकॉर्ड्स के अनुसार, इमरान खान ‘राइट सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन’ (RCRVO) नाम की एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। यह स्थिति तब पैदा होती है जब आंख की नस में खून का थक्का जम जाता है, जिससे आंखों की रोशनी पर सीधा हमला होता है। सुप्रीम कोर्ट में जमा रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला दावा किया गया है कि इमरान खान की दाहिनी आंख की रोशनी अब महज 15 फीसदी ही बची है।

अगस्त 2023 से सलाखों के पीछे बंद इमरान खान के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण है। एक तरफ भ्रष्टाचार के मामलों में मिली 14 साल की सजा और दूसरी तरफ गिरती सेहत ने उनके प्रशंसकों को बेचैन कर दिया है। जैसे ही खान को अस्पताल ले जाने की खबर फैली, पाकिस्तान की सियासत में उबाल आ गया।

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सोमवार को तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) और विपक्षी गठबंधन के कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि खान का मेडिकल चेकअप उनके निजी डॉक्टरों की देखरेख में होना चाहिए। विपक्ष ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि इमरान खान के परिवार को उनसे मिलने की तुरंत अनुमति दी जाए और उनके इलाज में किसी भी तरह की कोताही न बरती जाए। अस्पताल में इलाज के तुरंत बाद उन्हें वापस जेल की कालकोठरी में भेज दिया गया है, लेकिन उनकी सेहत पर छिड़ा यह विवाद अब थमता नजर नहीं आ रहा।

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