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India News: पश्चिम बंगाल में एक बार फिर इतिहास खुद को डरावने अंदाज में दोहरा रहा है। साल 2001 की भीषण तबाही के करीब 25 साल बाद राज्य में ‘निपाह वायरस’ (Nipah Virus) के संदिग्ध मामले सामने आए हैं। एम्स कल्याणी में कार्यरत दो नर्सों में इस जानलेवा संक्रमण की पुष्टि के बाद न केवल कोलकाता बल्कि दिल्ली के गलियारों में भी बेचैनी बढ़ गई है। केंद्र सरकार ने आनन-फानन में एक मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम बंगाल रवाना कर दी है।
अस्पताल से शुरू हुई दहशत की लहर
राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती ने पुष्टि की है कि संक्रमित होने वाली दोनों महिलाएं पेशे से नर्स हैं। वे फिलहाल उसी अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही हैं, जहाँ वे लोगों की सेवा कर रही थीं। हां, यह खबर इसलिए भी डरावनी है क्योंकि ये दोनों नर्सें हाल ही में बर्धमान जिले के दौरे पर गई थीं। अब प्रशासन उत्तर 24 परगना, पूर्व बर्धमान और नदिया जिलों में सघन ‘कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग’ कर रहा है ताकि संक्रमण की चेन को बढ़ने से रोका जा सके।
कितना घातक है यह वायरस?
निपाह वायरस को दुनिया के सबसे खतरनाक जूनोटिक (जानवरों से इंसानों में फैलने वाला) रोगों में गिना जाता है। यह मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों (फ्लाइंग फॉक्स) से फैलता है। इसकी गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें मृत्यु दर 40 से 75 प्रतिशत तक होती है। यानी संक्रमित होने वाले अधिकांश मरीजों के बचने की संभावना बहुत कम रहती है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि फिलहाल इसके लिए न तो कोई विशेष दवा बनी है और न ही कोई टीका उपलब्ध है।
सरकार की तैयारी और बचाव के उपाय
राज्य सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तीन आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। केंद्र से आई विशेषज्ञों की टीम में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) और वन्यजीव प्रभाग के दिग्गज शामिल हैं, जो यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर ये नर्सें संक्रमित कैसे हुईं।
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विशेषज्ञों की सलाह है कि पेड़ों से गिरे हुए फल बिल्कुल न खाएं, चमगादड़ों के बसेरे वाली जगहों से दूर रहें और अगर बुखार के साथ सिरदर्द या सांस लेने में तकलीफ हो, तो इसे हल्के में न लें। प्रशासन ने ‘संक्रमण रोकथाम और नियंत्रण प्रोटोकॉल’ को सख्ती से लागू कर दिया है ताकि 2001 जैसी स्थिति दोबारा पैदा न हो।

