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नोआमुंडी में दहशत की रात, हाथी ने उजाड़ा पूरा परिवार

Chaibasa News: पश्चिमी सिंहभूम जिले के अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र नोआमुंडी प्रखंड अंतर्गत जेटेया पंचायत के बाबरिया गांव से मंगलवार रात एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई, जिसने पूरे कोल्हान क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। रात करीब दस बजे जंगली हाथी के अचानक

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Chaibasa News: पश्चिमी सिंहभूम जिले के अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र नोआमुंडी प्रखंड अंतर्गत जेटेया पंचायत के बाबरिया गांव से मंगलवार रात एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई, जिसने पूरे कोल्हान क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। रात करीब दस बजे जंगली हाथी के अचानक हुए हमले में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना में पति-पत्नी और उनके तीन मासूम बच्चों ने अपनी जान गंवा दी, जबकि परिवार का केवल एक बच्चा किसी तरह बच पाया।घटना की पुष्टि वनरक्षी अमित महतो, जेटेया ग्राम पंचायत के मुखिया संजीत तिरिया और पंचायत समिति सदस्य दीपा गोप ने की है।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतकों में सनातन मेराल, उनकी पत्नी जोंकों कुई, उनके दो छोटे बच्चे तथा उसी गांव के मोगदा लागुरी शामिल हैं। बताया जाता है कि सभी लोग रात के समय अपने घर में सो रहे थे, तभी जंगली हाथी ने घर को तोड़ते हुए हमला कर दिया। एक ही घर में माता-पिता और बच्चों के शवों को देखकर गांव वालों की रूह कांप उठी। घटना के बाद बाबरिया गांव में मातम पसरा है और हर आंख नम है।

हाथी का आतंक केवल बाबरिया गांव तक सीमित नहीं रहा। इसी दौरान बड़ा पासीया गांव में भी एक ग्रामीण की जान चली गई, जबकि लांपाईसाई गांव में एक अन्य ग्रामीण को हाथी ने रौंदकर मार डाला। इन दोनों गांवों में मृतकों की पहचान अभी नहीं हो पाई है, लेकिन घटनाओं का तरीका एक जैसा है—रात का समय, घर के भीतर सोते ग्रामीण और अचानक मौत।

स्थानीय लोगों के अनुसार बीते दस दिनों में कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में हाथी के हमलों से 20 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक न तो किसी आपात स्थिति की घोषणा हुई है और न ही कोई ठोस व प्रभावी कार्रवाई नजर आ रही है। इससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश और भय व्याप्त है।

कोल्हान, सारंडा और आसपास के वनवर्ती गांवों में हालात बेहद भयावह हो चुके हैं। कई गांवों के लोग रात होते ही अपने घर छोड़ने को मजबूर हैं। बुंडू जैसे इलाकों के ग्रामीण जान बचाने के लिए रोवाम और अन्य अपेक्षाकृत सुरक्षित गांवों में शरण ले रहे हैं। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग ठंड के इस मौसम में खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं।

यह किसी सामान्य पलायन की स्थिति नहीं, बल्कि जिंदा रहने की मजबूरी बन चुकी है। हर रात गांवों में सन्नाटा, ठंड और मौत का डर छाया रहता है। ग्रामीणों के मन में बस एक ही सवाल घूम रहा है—“आज किसके घर मौत आएगी?” हाथी के हमलों ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को ठप कर दिया है। न कोई खेत जाने की हिम्मत कर पा रहा है और न ही कोई चैन की नींद सो पा रहा है। हर आहट पर लोग सहम उठते हैं और डर अब यहां के लोगों के जीवन का स्थायी हिस्सा बन चुका है।

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