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कोडरमा-मेघाटारी फोर-लेन के लिए NHAI को अब खोजना होगा नया रास्ता

रांची: झारखंड की सड़कों पर रफ्तार भरने का सपना देख रहे लोगों और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में जुटी एनएचएआई (NHAI) को अब वन्यजीवों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना होगा। कोडरमा से मेघाटारी तक बनने वाली प्रस्तावित फोर-लेन सड़क परियोजना को लेकर झारखंड

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रांची: झारखंड की सड़कों पर रफ्तार भरने का सपना देख रहे लोगों और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में जुटी एनएचएआई (NHAI) को अब वन्यजीवों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना होगा। कोडरमा से मेघाटारी तक बनने वाली प्रस्तावित फोर-लेन सड़क परियोजना को लेकर झारखंड उच्च न्यायालय में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि विकास की सड़क बेजुबानों के घर (अभयारण्य) को उजाड़कर नहीं गुजर सकती।

वैकल्पिक मार्ग पर मंथन का आदेश

अदालत ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को निर्देश दिया है कि वह राज्य वन्यजीव बोर्ड द्वारा सुझाए गए वैकल्पिक मार्ग का गहराई से अध्ययन करे। इस अध्ययन के आधार पर आठ सप्ताह के भीतर एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) कोर्ट में जमा करनी होगी। मामला गंभीर इसलिए है क्योंकि एनएचएआई ने पहले जो नक्शा तैयार किया था, वह सीधे कोडरमा वन्यजीव अभयारण्य के बीच से होकर गुजर रहा था। वन्यजीव बोर्ड ने इसे हरी झंडी देने से मना कर दिया था, क्योंकि इससे जानवरों के प्राकृतिक आवास और उनके आने-जाने के रास्तों (कोरिडोर) पर बुरा असर पड़ सकता था।

सरकार से मांगा गया ‘वाइल्डलाइफ कॉरिडोर’ का ब्यौरा

अदालत केवल सड़क तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर पूरी सरकार से जवाब मांगा है। झारखंड के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे दो हफ़्तों के भीतर हलफनामा दायर कर बताएं कि राज्य में वन्यजीवों के आवागमन मार्ग (कोरिडोर) की वर्तमान स्थिति क्या है। अदालत ने साफ कर दिया कि किसी भी बड़ी परियोजना को शुरू करने से पहले वन्यजीव बोर्ड की अनुमति कानूनी रूप से अनिवार्य है।

अब 28 अप्रैल पर टिकी निगाहें

पिछली सुनवाई में भी यह बात सामने आई थी कि एनएचएआई अब नए रास्ते की योजना बनाने की प्रक्रिया में है ताकि अभयारण्य को कोई नुकसान न पहुंचे। पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के कानूनों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए दायर इस जनहित याचिका पर अब अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी। देखना होगा कि विकास और पर्यावरण की इस जंग में बीच का क्या रास्ता निकलता है।

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