Ranchi : झारखंड सरकार ने वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक अहम निर्णय लेते हुए राज्य के मुटा क्षेत्र में स्थित गिद्ध संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र के संचालन के लिए महत्वपूर्ण स्वीकृति प्रदान की है। राज्य सरकार की ओर से प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्यप्राणी एवं मुख्य वन्यप्राणी प्रतिपालक, झारखंड तथा देश की प्रतिष्ठित संस्था Bombay Natural History Society (BNHS) के बीच होने वाले समझौता ज्ञापन (MoU) को कैबिनेट की मंजूरी मिली है।

यह अनुमोदन विशेष रूप से वित्तीय नियमावली के नियम 235 को शिथिल करते हुए नियम 245 के तहत किया गया है, ताकि केंद्र के संचालन में किसी प्रकार की प्रशासनिक या वित्तीय बाधा उत्पन्न न हो। सरकार का यह निर्णय राज्य में विलुप्तप्राय होते गिद्धों के संरक्षण और उनके प्रजनन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है।

गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये मृत जीवों को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखने में सहायक होते हैं और बीमारियों के प्रसार को रोकने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। पिछले कुछ दशकों में गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई है, जिससे पर्यावरण संतुलन पर भी गंभीर असर पड़ा है। ऐसे में मुटा स्थित यह केंद्र राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

इस MoU के तहत BNHS तकनीकी सहयोग, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और प्रशिक्षण की जिम्मेदारी निभाएगा, जबकि राज्य सरकार आवश्यक संसाधन, आधारभूत संरचना और प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराएगी। इसके माध्यम से न केवल गिद्धों के संरक्षण और प्रजनन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर वन्यजीव विशेषज्ञों को प्रशिक्षण के नए अवसर भी मिलेंगे।

सरकार का मानना है कि इस पहल से राज्य में जैव विविधता को संरक्षित करने में मदद मिलेगी और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में झारखंड की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होगी। यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और संतुलित पर्यावरण की दिशा में एक दूरदर्शी पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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