Ranchi : झारखंड विधानसभा परिसर में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में सिद्धो–कान्हू कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ लिमिटेड (सिद्धकोफेड) के निदेशक मंडल की चतुर्थ बैठक का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के कृषि और वनोपज क्षेत्र को मजबूत बनाने, किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने को लेकर व्यापक मंथन किया गया। बैठक में वित्तीय वर्ष 2025–26 और 2026–27 की कार्ययोजनाओं, बजट प्रस्तावों और नई योजनाओं को लेकर कई अहम निर्णय लिए गए।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बैठक को संबोधित करते हुए स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य दिलाना और समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि किसान झारखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी समृद्धि के बिना राज्य का समग्र विकास संभव नहीं है। सरकार उत्पादन से लेकर भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन तक किसानों को हर स्तर पर सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को किसानों के हित में एक विशेष मोबाइल एप्लीकेशन विकसित करने के निर्देश दिए। इस एप के माध्यम से किसान अपनी फसलों की जानकारी, बाजार भाव, आवश्यक कृषि सामग्री और विपणन से जुड़ी सूचनाएं सीधे प्राप्त कर सकेंगे। साथ ही उन्होंने एक स्थानीय कृषि पोर्टल तैयार करने का भी निर्देश दिया, जिससे उपभोक्ता सीधे किसानों से जुड़कर उत्पाद खरीद सकें। इस पहल से बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसानों को उनके उत्पादों की बेहतर कीमत मिल सकेगी।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण को भी किसानों की समृद्धि से जोड़ा। उन्होंने कहा कि चेक डैम, तालाब और अन्य जल संरचनाओं की मरम्मत और देखरेख बेहद जरूरी है। इस कार्य में किसानों के समूहों और जलसहिया समितियों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया, ताकि स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारी और पारदर्शिता बनी रहे।

मुख्यमंत्री ने झारखंड के विशिष्ट वनोपज जैसे लाह, तसर, रेशम, इमली, महुआ, कोदो, कुटकी, चिरौंजी और करंज के उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को बढ़ावा देने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन पारंपरिक उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने से राज्य के किसानों और वनोपज संग्राहकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

“किसान पाठशाला” और वीडियो आधारित प्रशिक्षण को भी ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, जैविक खेती, मूल्य संवर्धन और संरक्षण तकनीकों की जानकारी देने के लिए डिजिटल प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए जाएं, जिससे दूर-दराज के किसानों तक भी ज्ञान का लाभ पहुंच सके।

बैठक में कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, सचिव अबु बकर सिद्दीक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान सिद्धकोफेड के माध्यम से राज्य की कृषि और वनोपज आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सामूहिक रूप से आगे बढ़ने का संकल्प लिया गया। स्पष्ट संदेश यही रहा कि “जल, जंगल और जमीन” से जुड़ा विकास ही झारखंड के किसानों को मजबूत बनाएगा और राज्य को आर्थिक रूप से सुदृढ़ दिशा प्रदान करेगा।

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