World News: भारत के दो पडोसी देश में सियासत का काफी उलटफेर देखने को मिल रह है। पहला है बांग्लादेश और दूसरा- नेपाल, जो कभी सबसे शांति देशों की लिस्ट में था लेकिन जब से जेन-जी के विरोध प्रदर्शन से सत्ता पलट हुई है तब से कुछ ना कुछ हो रहा है। नेपाल की सियासत में बुधवार का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। देश की सबसे पुरानी और प्रभावशाली पार्टी, नेपाली कांग्रेस, औपचारिक रूप से तीसरी बार दो हिस्सों में बंट गई है। महीनों से चले आ रहे अंदरूनी घमासान का अंत आखिरकार पार्टी के विभाजन के साथ हुआ। राजधानी में आयोजित विशेष सम्मेलन में युवा नेता गगन थापा को सर्वसम्मति से पार्टी का नया अध्यक्ष चुन लिया गया, जिससे शेर बहादुर देउबा के दशकों पुराने वर्चस्व को सीधी चुनौती मिली है।

शेर बहादुर देउबा बनाम ‘जेन-जी’ की सोच

विभाजन की मुख्य वजह पार्टी के भीतर पीढ़ीगत बदलाव की मांग बनी। महासचिव गगन थापा और विश्व प्रकाश शर्मा लंबे समय से शेर बहादुर देउबा पर अध्यक्ष पद छोड़ने और भविष्य में चुनाव न लड़ने का दबाव बना रहे थे। उनका तर्क था कि सितंबर के युवा आंदोलन में जान गंवाने वाले ‘जेन-जी’ (Gen-Z) युवाओं की भावनाओं का सम्मान करने के लिए नेतृत्व का चेहरा बदलना अनिवार्य है। जब देउबा ने झुकने से इनकार कर दिया, तो गगन थापा ने अलग राह चुन ली।

इतिहास खुद को दोहरा रहा है: तीसरी बार बिखरी पार्टी

नेपाली कांग्रेस के लिए टूटने का यह जख्म नया नहीं है। इससे पहले 1953 और फिर 2002 में भी यह पार्टी सत्ता और सिद्धांतों की जंग में दो फाड़ हो चुकी है। नवनिर्वाचित अध्यक्ष गगन थापा ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी अब उन पुरानी गलतियों को नहीं दोहराएगी। उन्होंने ओली सरकार के दौरान युवाओं के दमन पर भी दुख जताया और दावा किया कि 60 प्रतिशत से अधिक प्रतिनिधि उनके साथ हैं।

नई राजनीतिक दिशा और देउबा गुट को चुनौती

गगन थापा ने न केवल कमान संभाली, बल्कि देउबा के नेतृत्व वाली केंद्रीय समिति को भंग करने की भी घोषणा कर दी है। विश्व प्रकाश शर्मा ने भी स्पष्ट किया कि असली नेपाली कांग्रेस वही है जिसे जनता और सम्मेलन का समर्थन प्राप्त है। विश्लेषकों का मानना है कि 49 वर्षीय थापा का अध्यक्ष बनना नेपाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत है, जहां अब पुराने दिग्गजों के बजाय युवाओं की आवाज को प्राथमिकता मिलेगी।

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