Lohardaga News: किस्को प्रखंड के सलैया काशीटांड़ में रविवार देर शाम हुआ सड़क हादसा पूरे इलाके को हिला गया। बॉक्साइट लदा ट्रक जब शांति नगसिया को अपनी चपेट में ले गया, तो चंद मिनटों में पूरा गांव सदमे में आ गया। घर के आंगन में मातम और सड़क पर लोगों का गुस्सा—दोनों साफ नजर आ रहे थे।

पोस्टमार्टम से मुआवजा तक, हर कदम पर मौजूद रहीं नीरू शांति –

घटना की खबर जैसे ही फैली, झारखंड आंदोलनकारी और पूर्व विधायक स्वर्गीय कमल किशोर भगत की पत्नी तथा झामुमो केंद्रीय समिति सदस्य नीरू शांति भगत तुरंत सदर अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने न सिर्फ खुद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कराई, बल्कि पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया कि न्याय हर हाल में मिलेगा।

अस्पताल से निकलते ही उन्होंने हिंडाल्को प्रबंधन को साफ संदेश दिया—“परिवार की बात मानी जाए, नहीं तो आंदोलन होगा।”
नीरू शांति भगत के इस कठोर रुख का असर कुछ ही घंटों में दिखने लगा।

संघर्ष जीत में बदला: हिंडाल्को ने माना हर शर्त –

सदर अस्पताल और अंचल कार्यालय परिसर में अंचल अधिकारी अजय कुमार और थाना प्रभारी मानस साधु की मौजूदगी में कंपनी के एचआर बिरेंद्र यादव से लंबी बातचीत हुई। बातचीत का नतीजा परिजनों के पक्ष में गया।

कंपनी ने लिखित सहमति दी कि—
परिवार को तत्काल 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।
एक आश्रित को कंपनी में नौकरी दी जाएगी।
मृतका के बच्चों की शिक्षा, देखभाल और भविष्य की नौकरी की जिम्मेदारी कंपनी उठाएगी।

आसपास खड़े मजदूर और ग्रामीण राहत की सांस लेते दिखे। सबने नीरू शांति भगत की इस निर्णायक भूमिका की जमकर सराहना की।

“लोहरदगा की जनता ही मेरा परिवार है” –

मौके पर नीरू शांति भगत ने भावुक होकर कहा कि अपने दिवंगत पति के सपनों को पूरा करते हुए वे हमेशा क्षेत्र की जनता के साथ खड़ी रहेंगी।
“लोहरदगा की जनता अब मेरा परिवार है… उनके अधिकारों के लिए लड़ना ही मेरा उद्देश्य है।”

उनकी इस सक्रियता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जनप्रतिनिधित्व केवल पद का अधिकार नहीं, बल्कि लोगों की आवाज उठाने का संकल्प है।

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