World News: सूडान की वायुसेना ने दारफूर के न्याला एयरपोर्ट पर एक बड़ा हमला बोला, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का एक विमान पूरी तरह तबाह हो गया। सूडान के सरकारी मीडिया के मुताबिक, इस विमान में कोलंबिया के भाड़े के सैनिक सवार थे और इस हमले में कम से कम 40 लोग मारे गए।

कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि उनकी सरकार यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हमले में कितने कोलंबियाई मारे गए। उन्होंने लिखा, ‘हम देखेंगे कि क्या उनके शवों को वापस लाया जा सकता है।’ पेट्रो ने भाड़े की सैन्य गतिविधियों पर बैन लगाने की बात भी कही और इसे ‘इंसानों को मारने की वस्तु बनाने का व्यापार’ बताया।

कोलंबियाई भाड़े के सैनिक, जो ज्यादातर पूर्व सैनिक या गुरिल्ला लड़ाके हैं, पहले भी यमन और खाड़ी देशों में UAE के लिए लड़ चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने 2024 के अंत से दारफूर में कोलंबियाई लड़ाकों की मौजूदगी की पुष्टि की है।

यह हमला बुधवार को उस एयरपोर्ट पर हुआ, जो रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) के कब्जे में है। सूडान की सेना और आरएसएफ के बीच अप्रैल 2023 से जंग चल रही है।एक सैन्य सूत्र ने बताया कि UAE का यह विमान न्याला एयरपोर्ट पर उतरते ही बमबारी में पूरी तरह नष्ट हो गया। दावा किया कि विमान खाड़ी देश के किसी एयरपोर्ट से उड़ा था और इसमें दर्जनों विदेशी लड़ाके और आरएसएफ के लिए हथियार व उपकरण थे। आरएसएफ दारफूर के ज्यादातर हिस्सों पर कब्जा किए हुए है। सूडान की सेना, जिसका नेतृत्व जनरल अब्देल फतह अल-बुरहान कर रहे हैं, लंबे समय से UAE पर आरोप लगाती रही है कि वह न्याला एयरपोर्ट के जरिए आरएसएफ को ड्रोन जैसे हथियार सप्लाई करता है। UAE ने इन आरोपों को खारिज किया है, हालांकि संयुक्त राष्ट्र, अमेरिकी अधिकारी और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों की रिपोर्ट्स इसके उलट संकेत देती हैं।

न्याला एयरपोर्ट, जो दक्षिण दारफूर की राजधानी में है, पिछले साल आरएसएफ के कब्जे में आया था। सूडान की सेना का दावा है कि आरएसएफ इस एयरपोर्ट का इस्तेमाल विदेशी हथियार और सोना तस्करी के लिए करता है। येल यूनिवर्सिटी के ह्यूमैनिटेरियन रिसर्च लैब की सैटेलाइट तस्वीरों में वहां चीनी निर्मित लंबी दूरी के ड्रोन दिखे हैं। जून में भी तीन गवाहों ने बताया था कि न्याला एयरपोर्ट पर एक कार्गो विमान को बमबारी में निशाना बनाया गया था। इस हफ्ते, सेना समर्थक गठबंधन ‘जॉइंट फोर्सेज’ ने दावा किया कि दारफूर के अल-फाशर में आरएसएफ के साथ 80 से ज्यादा कोलंबियाई भाड़े के सैनिक लड़ रहे हैं। इनमें से कई ड्रोन और तोपखाने हमलों में मारे गए।

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