World News: मध्य पूर्व एक बार फिर युद्ध की कगार पर खड़ा नजर आ रहा है। हाल ही में ईरान और इजरायल के बीच चला भीषण युद्ध भले ही थम गया हो, लेकिन ईरान के शीर्ष सैन्य अधिकारी इसे स्थायी शांति नहीं मानते। ईरान के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल सैय्यद अब्दुलरहीम मौसवी ने चेतावनी दी है कि किसी भी समय युद्ध फिर से शुरू हो सकता है, और उनका देश हर हमले का करारा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
युद्धविराम पर संदेह, मिसाइलें तनी
ईरानी सेना के प्रमुख मौसवी ने कहा कि ईरान को इस युद्धविराम पर पूरा भरोसा नहीं है। उन्होंने दो टूक कहा, “हमने युद्ध नहीं छेड़ा, लेकिन हमने पूरी ताकत से जवाब दिया। अब अगर दुश्मन दोबारा हमला करता है तो हम पहले से भी ज्यादा ताकत से जवाब देंगे।” यह बयान उन्होंने उस समय दिया जब उन्होंने सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान से टेलीफोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने क्षेत्रीय सुरक्षा और आपसी संबंधों पर चर्चा की।
मौत के बाद मिला नया सैन्य नेतृत्व
गौरतलब है कि 13 जून को इजरायल के हवाई हमले में ईरान के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ मोहम्मद बाघेरी की मौत हो गई थी। उसी दिन दोनों देशों के बीच युद्ध शुरू हुआ था। इसके बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने मेजर जनरल मौसवी को नया सेना प्रमुख नियुक्त किया। मौसवी अब युद्धविराम की निगरानी के साथ-साथ संभावित हमले के लिए सैन्य तैयारियों को तेज कर चुके हैं।
सऊदी और ईरान के बीच कूटनीतिक संपर्क
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सऊदी अरब और ईरान के रक्षा अधिकारियों के बीच हुई यह पहली वार्ता भी खास महत्व रखती है। सऊदी प्रेस एजेंसी के मुताबिक, यह वार्ता ईरान की पहल पर शुरू हुई और इसमें रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर चर्चा हुई। यह बातचीत इस क्षेत्र में दो प्रमुख देशों के रिश्तों में तनाव को कम करने की दिशा में एक कदम मानी जा रही है।
क्या फिर भड़क सकता है मिडिल ईस्ट?
इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य पूर्व में तनाव को एक बार फिर बढ़ा दिया है। जहां एक ओर अमेरिका ने संघर्षविराम की घोषणा में मध्यस्थता की थी, वहीं ईरान को इस पहल पर भरोसा नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने अपनी मिसाइलें इजरायल की ओर तैनात कर दी हैं और सैन्य गतिविधियों को बढ़ा दिया है।
ईरान का मानना है कि इजरायल किसी भी समय फिर से हमला कर सकता है, और इसीलिए वह अपने रक्षा कवच को मजबूत कर रहा है। मौसवी ने स्पष्ट किया कि ईरान अब केवल जवाबी हमलों की नीति पर चलेगा, लेकिन उसके जवाब इस बार और अधिक निर्णायक और आक्रामक होंगे।
अमेरिका की भूमिका पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। ईरान का मानना है कि अमेरिकी मध्यस्थता पर पूरी तरह से भरोसा नहीं किया जा सकता। ट्रंप प्रशासन ने 24 जून को युद्धविराम की घोषणा की थी, लेकिन ईरान के मुताबिक, यह सिर्फ एक अस्थायी उपाय है।



