Social News: अफ्रीका के मॉरिटानिया देश में आज भी एक अनूठी परंपरा चल रही है, जहां मोटी लड़कियों को ही सबसे सुंदर और योग्य जीवनसाथी माना जाता है। स्थानीय भाषा में इसे ‘लेबलूह’ कहा जाता है। इसके तहत लड़कियों को पांच साल की उम्र से ही खास डाइट दी जाती है जिसमें मिलेट, दूध और घी भरपूर होता है। यहां का मानना है कि जितनी मोटी लड़की, उतनी समृद्ध और धनवान परिवार में शादी की संभावनाएं अधिक होती हैं।

मॉरिटानिया की इस परंपरा के पीछे इतिहास और सांस्कृतिक सोच है। पुराने समय में भोजन की कमी थी, ऐसे में मोटी महिलाएं घर की संपन्नता और वैभव का प्रतीक मानी जाती थीं। लोकगीतों और कथाओं में भी मोटे शरीर की खूब सराहना की जाती है।

लेकिन यह परंपरा स्वास्थ्य के लिहाज से खतरनाक साबित हो सकती है। जबरन खिलाने से डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारियों और मानसिक तनाव का खतरा बढ़ जाता है। ग्रामीण इलाकों में कई लड़कियों को ‘फैट फार्म्स’ भेजा जाता है, जहां दिनभर खाना खिलाया जाता है और वजन न बढ़ने पर उन्हें सजा भी दी जाती है। एक स्टडी के अनुसार, ऐसी लड़कियों में मोटापा 60 प्रतिशत ज्यादा पाया गया।

चिंता की बात यह है कि 2008 में सरकार ने इस परंपरा पर बैन लगाया था, बावजूद इसके 2025 में भी लगभग 20-30 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों में लेबलूह जारी है। हालांकि, अब नई पीढ़ी की लड़कियों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ रही है और वे दुबलेपन के फायदों को अपनाने लगी हैं।

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