Ranchi : स्वतंत्रता सेनानी, भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री और महान विचारक मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती मंगलवार को अंजुमन इस्लामिया राँची द्वारा श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। समारोह की शुरुआत मदरसा इस्लामिया राँची में कुरआन ख्वानी से हुई, जिसमें मौलाना आजाद के हक में सामूहिक दुआ की गई। इस अवसर पर अंजुमन इस्लामिया के महासचिव डॉ. तारीक हुसैन, मदरसा के प्राचार्य मौलाना शुजाउल हक, कन्वेनर साजिद उमर, शिक्षक मोहम्मद इरशाद, मोहम्मद इमरान, जियाउल आसिफ, और अंजुमन के सदस्य शहजाद बबलूहाफिज मोहम्मद जावेद सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

कुरआन ख्वानी के बाद छात्रों के बीच क्विज, निबंध और भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई। इन प्रतियोगिताओं में मदरसा इस्लामिया के अलावा शहर के अन्य स्कूलों और मौलाना आजाद लाइब्रेरी एवं स्टडी सेंटर के छात्रों ने भी उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। प्रतियोगिता की अगुवाई कन्वेनर लतीफ आलम ने की।

इस मौके पर डॉ. तारीक हुसैन ने कहा कि मौलाना आजाद सिर्फ एक स्वतंत्रता सेनानी नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी शिक्षाविद, पत्रकार और लेखक थे। उन्होंने शिक्षा को हर वर्ग तक पहुँचाने का बीड़ा उठाया और देश में समानता एवं एकता की मिसाल कायम की। उन्होंने रांची में नजरबंदी के दौरान भी शिक्षा का प्रचार-प्रसार जारी रखा और मदरसा इस्लामिया रांची की स्थापना की।

वहीं लतीफ आलम ने अपने संबोधन में कहा कि आज भारत के कई संस्थान जैसे आईआईटी, यूजीसी, साहित्य अकादमी और संगीत नाटक अकादमी मौलाना आजाद की दूरदर्शी सोच का परिणाम हैं। उन्होंने भारत की ताकत को इसकी विविधता में बताया और हमेशा हिंदू-मुस्लिम एकता की वकालत की।

कार्यक्रम में मौजूद छात्र-छात्राओं को उनकी प्रतिभा के लिए प्रोत्साहित किया गया। प्रतियोगिता के विजेताओं को अगले कुछ दिनों में प्रशस्ति पत्र और मेडल देकर सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम को सफल बनाने में हीना कौशर, नैयर सरताज, मो. अफजल, नैना खान मुस्कान, वहीदा निगार सुल्ताना और हाफिज जावेद का विशेष योगदान रहा।

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