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कैमूर की पहाड़ियों में स्थित मांझर कुंड क्यों है सिखों के लिए खास? जानें इतिहास

सासाराम की कैमूर पहाड़ियों में स्थित मांझर कुंड में सावन पूर्णिमा के बाद ऐतिहासिक पहाड़ मेला आयोजित हुआ, जहां सिख श्रद्धालुओं ने विशेष पूजा और शबद-कीर्तन किया।

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SASARAM: बिहार के रोहतास जिले में सासाराम के पास कैमूर पहाड़ियों की वादियों में स्थित मांझर कुंड और धुआं कुंड जलप्रपात प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक धरोहरों का एक बेमिसाल संगम पेश करते हैं। घने जंगलों और हरी-भरी पहाड़ियों के बीच बहने वाली प्राकृतिक जलधाराएं मानसून और सावन के महीने में सैलानियों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। सासाराम से दक्षिण दिशा में कैमूर पर्वत श्रृंखला पर स्थित मांझर कुंड तक पहुंचने के लिए दुर्गम पहाड़ी रास्तों से गुजरना पड़ता है। यहां नदी का पानी लगभग 300 फीट की ऊंचाई से नीचे गिरता है, जो पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र है। इसके पास ही मौजूद धुआं कुंड भी अपनी मनोरम प्राकृतिक छटा के लिए मशहूर है।

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सिख धर्म और गुरु तेग बहादुर जी से जुड़ा इतिहास

मांझर कुंड का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व बेहद खास है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सिखों के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर जी अपनी यात्रा के दौरान इस क्षेत्र में पधारे थे। तभी से यहां सिख समुदाय द्वारा विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक समागम की परंपरा चली आ रही है। प्राचीन परंपरा के तहत सिख श्रद्धालु गुरु ग्रंथ साहिब के साथ यहां पहुंचते रहे हैं और कई दिनों तक रुककर धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। स्थानीय लोगों का यह भी मानना है कि इस जलप्रपात के पानी में प्राकृतिक खनिज पाए जाते हैं, जो सेहत और त्वचा के लिए काफी गुणकारी हैं।

सावन पूर्णिमा के बाद लगा ऐतिहासिक मेला

मांझर कुंड में हर साल रक्षाबंधन यानी सावन पूर्णिमा के बाद आने वाले पहले रविवार को भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। इस बार भी पूर्णिमा के पहले रविवार को यह स्थल देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों से गुलजार रहा। श्रद्धालु शनिवार की रात से ही जुटने लगे थे। इस दौरान पूरे माहौल में शबद-कीर्तन की गूंज रही और लोगों ने पवित्र जलधारा में स्नान कर प्राकृतिक वातावरण का आनंद लिया।

ऐतिहासिक गुरुद्वारा गुरु के बाग से पारंपरिक पहाड़ मेले की यात्रा निकाली गई। गुरु बाग के प्रबंधक सह अध्यक्ष महंत बजरंगी दास ने बताया कि सैकड़ों वर्षों से चली आ रही इस समृद्ध परंपरा के तहत श्रद्धालु मांझर कुंड पहुंचे और देश, राज्य व समाज में सुख, शांति तथा आपसी भाईचारे की अरदास की। मेले में उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए रोहतास के डीएम (जिलाधिकारी) दीपक कुमार मिश्रा ने पहले ही सुरक्षा और विधि-व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए थे। आस्था और पर्यटन का यह केंद्र आज भी पूरे बिहार में अपनी अनूठी पहचान बनाए हुए है।

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