Malé, (Maldives): मालदीव और मॉरीशस के बीच चागोस द्वीपसमूह (Chagos Archipelago) से सटे समुद्री क्षेत्र को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। मालदीव के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसने उत्तरी चागोस समुद्री क्षेत्र पर अपना सैन्य नियंत्रण स्थापित कर लिया है। यह कदम ‘इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ द सी’ (ITLOS) के उस फैसले को सीधी चुनौती माना जा रहा है, जिसमें इस क्षेत्र को मॉरीशस का हिस्सा बताया गया था।

ड्रोन और जहाजों से पैनी निगरानी

मालदीव नेशनल डिफेंस फोर्स (MNDF) ने 4 फरवरी से एक विशेष ऑपरेशन शुरू किया है। इसके तहत मालदीव ने अपने कोस्ट गार्ड जहाज ‘धरमवंथा’ और एयर कॉर्प्स के घातक ड्रोनों को तैनात किया है। यह अभियान मालदीव की दक्षिणी बेसलाइन से 200 नॉटिकल मील तक फैले ‘विशेष आर्थिक क्षेत्र’ (EEZ) की सुरक्षा के नाम पर चलाया जा रहा है। रक्षा मंत्रालय का तर्क है कि वे अपने संविधान के तहत परिभाषित क्षेत्रीय सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं।

मुइज्जू सरकार ने पलटा पूर्व सरकार का फैसला

राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने संसद में घोषणा की कि उनकी सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह द्वारा मॉरीशस को भेजा गया वह पत्र वापस ले लिया है, जिसमें चागोस की संप्रभुता को लेकर नरम रुख अपनाया गया था। मुइज्जू के अनुसार, पिछली सरकार का कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और समुद्री हितों के लिए हानिकारक था। उन्होंने कैबिनेट और कानूनी विशेषज्ञों की सलाह पर अब चागोस पर मालदीव के कड़े रुख को स्पष्ट कर दिया है।

बढ़ सकता है अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक दबाव

मालदीव का यह आक्रामक रुख हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता के लिए नई चुनौतियां खड़ा कर सकता है। जहाँ मॉरीशस इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन मान रहा है, वहीं मालदीव इसे अपनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा बता रहा है। जानकारों का मानना है कि इस कदम से मालदीव अंतरराष्ट्रीय कानूनी संस्थानों के साथ सीधे टकराव की स्थिति में आ गया है, जिससे आने वाले दिनों में कूटनीतिक तनाव और बढ़ना तय है।

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