वॉशिंगटन: दुनिया जहां दौलत जमा करने की होड़ में लगी है, वहीं एक महिला ऐसी भी है जो अपनी अरबों की संपत्ति को समाज की भलाई के लिए लुटाने का संकल्प ले चुकी है।
दुनिया की सबसे अमीर महिला का सबसे बड़ा दिल; मैकेंजी स्कॉट ने परोपकार में बनाया विश्व रिकॉर्ड
हम बात कर रहे हैं Amazon के संस्थापक जेफ बेजोस की पूर्व पत्नी मैकेंजी स्कॉट की। वर्ष 2025 में मैकेंजी ने उदारता की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने वारेन बफेट और बिल गेट्स जैसे दिग्गजों को भी पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने इस अकेले साल में 7.1 बिलियन डॉलर (भारतीय मुद्रा में करीब 60 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा) का दान देकर वैश्विक कीर्तिमान स्थापित किया है।
शिक्षा जगत पर मेहरबान: हॉवर्ड यूनिवर्सिटी को मिला ऐतिहासिक चंदा
मैकेंजी के दान का सबसे बड़ा हिस्सा शिक्षा और सामाजिक समानता के क्षेत्र में गया है। उनकी वेबसाइट ‘यील्ड गिविंग’ (Yield Giving) के अनुसार, उन्होंने इस साल कुल 186 संस्थाओं को मदद पहुँचाई है। इसमें सबसे चर्चित रहा हॉवर्ड यूनिवर्सिटी को दिया गया 88 मिलियन डॉलर का दान। यूनिवर्सिटी के 158 वर्षों के इतिहास में यह किसी भी एक व्यक्ति द्वारा दी गई सबसे बड़ी सहायता राशि है। इसके अलावा, छात्रों को डिग्री दिलाने में मदद करने वाली संस्था ‘10,000 डिग्री’ को भी उन्होंने 42 मिलियन डॉलर की भारी-भरकम राशि सौंपी है।
परोपकार के लिए घटाई Amazon में हिस्सेदारी; 43% शेयर बेचे
अरबों डॉलर के इस दान को संभव बनाने के लिए मैकेंजी स्कॉट ने अपनी वित्तीय रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अपनी परोपकारी मुहिम के लिए फंड जुटाने हेतु उन्होंने Amazon (Amazon) में अपनी हिस्सेदारी को तेजी से कम किया है। ताजा रिपोर्ट्स की मानें तो उन्होंने हाल ही में करीब 12.6 बिलियन डॉलर मूल्य के शेयर बेचे हैं। 2019 में जेफ बेजोस से तलाक के समय उन्हें मिली संपत्ति का अब तक लगभग 43 प्रतिशत हिस्सा वे समाज कल्याण के लिए बेच चुकी हैं। उनके पास अब Amazon के केवल 81.10 मिलियन शेयर ही शेष रह गए हैं।
द गिविंग प्लेज: अमीरी से ज्यादा सेवा का संकल्प
29.90 बिलियन डॉलर की संपत्ति की मालकिन होने के बावजूद मैकेंजी का मानना है कि वे अपनी अधिकांश संपत्ति दुनिया को वापस लौटा देंगी। उन्होंने ‘द गिविंग प्लेज’ पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका उद्देश्य मरते दम तक अपनी आधी से ज्यादा दौलत दान करना है। उनका दान देने का तरीका भी अन्य दानदाताओं से अलग है; वे सीधे संस्थाओं को पैसा भेजती हैं और उनके काम में हस्तक्षेप नहीं करतीं। मैकेंजी की यह मुहिम आज दुनिया भर के पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में नई उम्मीद की किरण बनकर उभरी है।



