Patna: दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने आईआरसीटीसी होटल घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के मुखिया और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव समेत उनके परिवार की मुश्किलें बढ़ाने वाले फैसले को फिलहाल टाल दिया है। कोर्ट अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने पर अपना फैसला आगामी 9 जून को सुनाएगा। प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है।
दरअसल, ईडी का यह मामला आईआरसीटीसी होटल घोटाले से कमाए गए काले धन को सफेद करने (धन शोधन) से जुड़ा हुआ है। इस मामले की शुरुआत केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज की गई एफआईआर से हुई थी। लालू यादव पर आरोप हैं कि साल 2004 से 2009 के बीच जब वे देश के रेल मंत्री थे, तब उन्होंने नियमों को ताक पर रखकर आईआरसीटीसी होटलों के संचालन और रख-रखाव के ठेके एक निजी कंपनी को सौंप दिए थे।
जांच एजेंसियों का कहना है कि ये ठेके जिन लोगों को दिए गए, वे लालू यादव के बेहद करीबी थे। इसके एवज में लालू परिवार और उनके करीबियों से जुड़ी एक बेनामी कंपनी के नाम पर करीब तीन एकड़ की कीमती जमीन ट्रांसफर की गई थी।
इस सियासी और कानूनी भंवर में अकेले लालू यादव ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव व तेज प्रताप यादव और बेटियां मीसा भारती व हेमा यादव भी फंसी हुई हैं। इससे पहले, विशेष न्यायाधीश ने प्रवर्तन निदेशालय और बचाव पक्ष के वकीलों की लंबी और तीखी दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
आपको बता दें कि इसी घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के एक अन्य मामले में लालू, राबड़ी और तेजस्वी यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है। वहां उनकी आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाएं अभी पेंडिंग हैं, जिनमें ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप तय करने के आदेश को चुनौती दी गई है। पिछले साल अक्टूबर में राउज एवेन्यू कोर्ट ने इन सभी के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत आरोप तय करने के निर्देश दिए थे। दूसरी तरफ, लालू यादव शुरू से ही इन आरोपों को सिरे से खारिज करते रहे हैं। उनका कहना है कि होटलों के टेंडर पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से जारी किए गए थे।
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