रांची: रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में एक महिला कैदी के गर्भवती होने और उससे जुड़े कथित यौन शोषण के गंभीर मामले ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। मंगलवार को झारखंड उच्च न्यायालय में इस बेहद संवेदनशील मामले पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत की कार्यवाही के दौरान राज्य सरकार ने पीड़ित महिला कैदी की मेडिकल बोर्ड रिपोर्ट एक सीलबंद लिफाफे में न्यायाधीशों के समक्ष प्रस्तुत की। इसके साथ ही, उच्च न्यायालय के पूर्व आदेशों के तहत कराई जा रही न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) की वर्तमान स्थिति से जुड़ी स्टेटस रिपोर्ट भी अदालत पटल पर रखी गई।

यह महत्वपूर्ण सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ में हुई। मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कोर्ट खुद इस पूरे घटनाक्रम की बारीकी से निगरानी कर रहा है। मंगलवार की सुनवाई के दौरान रांची के जुडिशियल कमिश्नर की तरफ से न्यायिक जांच से संबंधित एक अन्य सीलबंद रिपोर्ट भी खंडपीठ को सौंपी गई। अदालत ने सीलबंद लिफाफों में आईं इन दोनों ही रिपोर्टों का गहनता से अवलोकन किया और इसके बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 9 जुलाई की तारीख मुकर्रर कर दी।

क्या है कानूनी प्रक्रिया?

पिछली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया था कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए रांची के जुडिशियल कमिश्नर ने 19 मई 2026 को ही जुडिशियल मजिस्ट्रेट-11 को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 196(2)(बी) के तहत मामले की न्यायिक जांच करने का आदेश दिया था। जांच अधिकारी को एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया था, जिसे अब सरकार ने कोर्ट के सामने पेश कर अपना वादा पूरा किया है।

यह पूरा मामला तब राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में गरमा गया था, जब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जेल के भीतर सुरक्षा और महिला कैदियों के शोषण से जुड़ा यह मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया था। मीडिया में खबरें आने के बाद झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) तुरंत हरकत में आया और मामले की सच्चाई का पता लगाने के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया।

झालसा की इस विशेष टीम ने स्वयं होटवार जेल का दौरा कर जमीनी हकीकत जानी थी। टीम ने न केवल पीड़ित महिला कैदी, बल्कि जेल में तैनात पैरा लीगल वालंटियर (PLV) और जेल के डॉक्टर के भी बयान दर्ज किए थे। झालसा के अलावा, रांची जिला प्रशासन और जेल महानिरीक्षक (IG जेल) के स्तर पर भी इस मामले की अलग से स्वतंत्र जांच कराई गई थी। अब सभी पक्षों और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट अदालत के पास पहुंच चुकी हैं। कानून के जानकारों का मानना है कि 9 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में इस मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और जेल सुधारों को लेकर कोई बड़ा निर्देश आ सकता है।

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