नई दिल्ली/रांची: झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित 16वें वित्त आयोग की हाई-लेवल राष्ट्रीय कार्यशाला में हिस्सा लिया। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान उन्होंने झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों और त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के विकास को लेकर राज्य का पक्ष बेहद मजबूती से रखा। मंत्री ने केंद्र सरकार से पुरजोर मांग की कि झारखंड की पंचायतों के विकास के लिए मिलने वाले केंद्रीय अनुदान को समय पर जारी किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने परफॉर्मेंस ग्रांट (कार्यप्रदर्शन अनुदान) के वितरण के नियमों में झारखंड जैसे राज्यों के लिए थोड़ी उदारता और ढील बरतने की भी अपील की।

शुक्रवार को नई दिल्ली से जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से ग्रामीण विकास मंत्री ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जब भी केंद्र सरकार के स्तर से अनुदान राशि जारी करने में देरी होती है, तो उसका सीधा और नकारात्मक असर सीधे ग्राम पंचायतों की विकास योजनाओं और जमीनी कार्यों पर पड़ता है। समय पर फंड न मिलने से कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचागत परियोजनाएं अधर में लटक जाती हैं।

केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल की गरिमामयी मौजूदगी में बोलते हुए दीपिका पांडेय सिंह ने आंकड़ों के साथ राज्य की आवश्यकताओं को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि 16वें वित्त आयोग के तहत वर्ष 2026-27 से लेकर वर्ष 2030-31 की अवधि के बीच झारखंड की पंचायती राज संस्थाओं को कुल 14,231 करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

इस प्रस्तावित वित्तीय पैकेज का विवरण साझा करते हुए उन्होंने बताया कि इसमें से 11,385 करोड़ रुपये ‘बेसिक ग्रांट’ (मूल अनुदान) के रूप में और शेष 2,846 करोड़ रुपये ‘परफॉर्मेंस ग्रांट’ के रूप में शामिल हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह भारी-भरकम राशि हमारी ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के वित्तीय ढांचे को सुदृढ़ करेगी, जिससे स्थानीय स्तर पर लोक कल्याणकारी सेवाओं और ग्रामीण विकास को एक नई गति मिल सकेगी। इसके साथ ही उन्होंने 15वें वित्त आयोग की रुकी हुई बकाया राशि का भुगतान भी अविलंब करने का आग्रह किया।

मंत्री ने बैठक में नीतिगत सुझाव देते हुए कहा कि पिछले वित्त आयोगों की जो राशि तकनीकी कारणों से अप्रयुक्त (Unused) रह गई है, उसके सदुपयोग को लेकर केंद्र को स्पष्ट गाइडलाइंस जारी करनी चाहिए। झारखंड की सीमित आंतरिक राजस्व क्षमता का हवाला देते हुए उन्होंने केंद्र से अनुरोध किया कि परफॉर्मेंस ग्रांट तय करने के मानकों में व्यावहारिक और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया जाए। इस राष्ट्रीय कार्यशाला में झारखंड राज्य पंचायती राज विभाग की निदेशक बी. राजेश्वरी सहित विभाग के कई आला अधिकारी और नीति निर्धारक उपस्थित थे।

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