Ranchi: झारखंड के सरकारी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक संस्थानों में अनुशासन और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक संगठित शिकायत निवारण तंत्र (Grievance Redressal Mechanism) लागू करने का निर्णय लिया है। इसका विस्तृत प्रारूप तैयार कर सभी विश्वविद्यालयों को भेज दिया गया है, जिसे सिंडिकेट से मंजूरी मिलने के बाद धरातल पर उतारा जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर अलग-अलग समितियां काम करेंगी। छात्र अब नामांकन में अनियमितता, सुविधाओं की कमी, भेदभाव, उत्पीड़न या छात्र संघ चुनाव से जुड़ी किसी भी प्रकार की शिकायत एक तय मंच पर दर्ज करा सकेंगे। कॉलेज स्तर की समिति की कमान प्राचार्य के हाथों में होगी, जिसमें वरिष्ठ शिक्षकों के साथ छात्र प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा।
विश्वविद्यालय स्तर पर इस तंत्र की अध्यक्षता छात्र कल्याण निदेशक (DSW) करेंगे। इस समिति में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधित्व अनिवार्य किया गया है ताकि सामाजिक न्याय सुनिश्चित हो सके। वहीं, शिक्षकों और कर्मचारियों की सेवा से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए एक अलग उच्चस्तरीय समिति बनेगी, जिसकी अध्यक्षता एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे। इसमें प्रशासनिक और वित्त सेवा के विशेषज्ञ भी सदस्य के तौर पर शामिल होंगे।
विश्वविद्यालय प्रोफेसर संघ ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। संघ के अध्यक्ष डॉ. राजकुमार का कहना है कि अगर इन समितियों का गठन पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाए और शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई हो, तो इससे विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक वातावरण में सकारात्मक सुधार आएगा। इस नई व्यवस्था से न केवल शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि छात्रों और प्रशासन के बीच बेहतर संवाद भी स्थापित होगा।



