Ranchi News: झारखंड अलग राज्य की लड़ाई में अपनी जवानी खपा देने वाले आंदोलनकारियों के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। राज्य के गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने एक बड़ा फैसला लेते हुए 8659 राज्य आंदोलनकारियों की 38वीं संपुष्ट सूची जारी कर दी है। इस सूची में राज्य के सभी 24 जिलों के रणबांकुरों के नाम शामिल किए गए हैं, जिन्हें अब न केवल सम्मान पेंशन मिलेगी, बल्कि उनके परिवारों को सरकारी नौकरियों में भी विशेष लाभ दिया जाएगा।
पेंशन का गणित: कारावास की अवधि तय करेगी राशि
सरकार द्वारा जारी संकल्प के अनुसार, पेंशन की राशि जेल की अवधि के आधार पर तय की गई है। जिन आंदोलनकारियों ने 3 महीने से कम समय जेल में बिताया, उन्हें ₹3500 प्रतिमाह मिलेंगे। 3 से 6 महीने तक जेल काटने वालों को ₹5000 और 6 महीने से अधिक समय तक सलाखों के पीछे रहने वाले संघर्षियों को ₹7000 प्रतिमाह सम्मान पेंशन दी जाएगी। खास बात यह है कि आंदोलनकारी की मृत्यु के बाद उनके एक आश्रित को यह पेंशन जीवनभर मिलती रहेगी।
नौकरी में आरक्षण और सीधी नियुक्ति का लाभ
सरकार ने आंदोलनकारियों के आश्रितों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भी ठोस कदम उठाए हैं। पुलिस फायरिंग या जेल के दौरान 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांग हुए आंदोलनकारियों के एक आश्रित को राज्य सरकार के तृतीय एवं चतुर्थ वर्गीय पदों पर सीधी नियुक्ति दी जाएगी। वहीं, अन्य सभी चिन्हित आंदोलनकारियों के परिवार के सदस्यों को सरकारी नौकरियों में 5 प्रतिशत क्षैतिज (Horizontal) आरक्षण का लाभ मिलेगा।
किस जिले में कितने आंदोलनकारी?
इस सूची में सबसे अधिक बोकारो से 881, रामगढ़ से 792, देवघर से 767 और दुमका से 748 आंदोलनकारियों को जगह मिली है। वहीं राजधानी रांची से 255 और जमशेदपुर से 588 लोग चिन्हित किए गए हैं। सबसे कम संख्या पाकुड़ (13) और सिमडेगा (34) जिलों की है। सरकार के इस फैसले से सालों से अपनी पहचान और हक की लड़ाई लड़ रहे परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है।



