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भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में झारखंड पवेलियन चमका, प्राकृतिक शहद और रेशम उत्पाद बने आकर्षण का केंद्र

New Delhi : प्रगति मैदान में आयोजित भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 में झारखंड पवेलियन इन दिनों लोगों के बीच खास आकर्षण बना हुआ है। पवेलियन में लगे वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के स्टॉल पर प्रदर्शित प्राकृतिक शहद, रेशम और लाह के उत्पादों

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New Delhi : प्रगति मैदान में आयोजित भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 में झारखंड पवेलियन इन दिनों लोगों के बीच खास आकर्षण बना हुआ है। पवेलियन में लगे वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के स्टॉल पर प्रदर्शित प्राकृतिक शहद, रेशम और लाह के उत्पादों ने आगंतुकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यहां झारखंड की समृद्ध वन संपदा, जैव-विविधता और वन संरक्षण के प्रयासों को भी बेहद प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

वन क्षेत्र पदाधिकारी राजेंद्र प्रसाद के अनुसार झारखंड की कुल भूमि का लगभग 31.8 प्रतिशत हिस्सा घने वनों से आच्छादित है राज्य में सबसे अधिक शाल वृक्ष पाए जाते हैं, जबकि गम्हार, सागवान, शीशम जैसे बहुमूल्य पेड़ों की भी व्यापक मौजूदगी है। इनकी लकड़ी घरेलू और व्यावसायिक उपयोगों में काफी लोकप्रिय है। वहीं सजावटी पेड़ों की बात करें तो गुलमोहर, अमलतास, जकरंदा और प्लेटोफार्म जैसे पौधे झारखंड के प्राकृतिक सौंदर्य में चार चाँद लगाते हैं।

स्टॉल पर लोगों को झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त ऑर्गेनिक शहद, विशेषकर लीची, करंज, वन तुलसी और वाइल्ड हनी जैसी वैराइटी खूब पसंद आ रही हैं। इसके अलावा ग्रामीण महिलाओं द्वारा निर्मित लाह के उत्पाद, रेशम की साड़ियाँ और हस्तनिर्मित बांस सामग्री भी बिक्री का केंद्र बने हुए हैं।

राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि राज्य सरकार वन संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री जन वन योजना सहित कई महत्वपूर्ण योजनाएँ संचालित कर रही है। संरक्षण कार्यों में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न समितियाँ बनाई गई हैं। ये समितियाँ न सिर्फ वनों की सुरक्षा करती हैं बल्कि वनोत्पादों के प्रसंस्करण और विपणन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

झारखंड अपने समृद्ध वनोपज ऑर्गेनिक काजू, शहद, लाह और विविध औषधीय पौधों के लिए भी प्रसिद्ध है। प्रदेश में शतावर, गोखरू, कालमेघ, अर्जुन, नीम, ब्राह्मी, शंखपुष्पी, भृंगराज सहित कई जड़ी-बूटियाँ बड़े पैमाने पर पाई जाती हैं, जिनकी मांग देशभर में है।

वन्य प्राणियों के संरक्षण की बात करें तो झारखंड में 1 व्याघ्र आरक्षित क्षेत्र, 1 गज आरक्षित क्षेत्र, 1 राष्ट्रीय उद्यान, 11 वन्य प्राणी आश्रयणी, 1 जैविक उद्यान, 1 मृग विहार और 1 मगर प्रजनन केंद्र संचालित हैं। पलामू का बेतला व्याघ्र आरक्ष्य, सिंहभूम का दलमा गज आरक्ष्य, तथा उधवा पक्षी अभयारण्य सहित अन्य संरक्षित क्षेत्र राज्य की जैव-विविधता का आधार हैं। वहीं रांची स्थित मूटा मगर प्रजनन केंद्र और भगवान बिरसा जैविक उद्यान ex-situ संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

झारखंड पवेलियन में विभाग द्वारा प्रस्तुत यह समग्र परिचय आगंतुकों को राज्य की प्राकृतिक धरोहर, वन संस्कृति और संरक्षण प्रयासों से रूबरू करा रहा है।

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