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Home»States»Jharkhand»झारखंड में कालाजार का ‘दी एंड’! अब पाकुड़ के सिर्फ एक प्रखंड में बचा असर
Jharkhand

झारखंड में कालाजार का ‘दी एंड’! अब पाकुड़ के सिर्फ एक प्रखंड में बचा असर

झारखंड में कालाजार अब अंतिम चरण में है, केवल पाकुड़ के लिट्टीपाड़ा में मामले शेष हैं। 10 फरवरी से राज्य के 14 जिलों में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए महाअभियान (MDA) शुरू होगा।
By Samsul HaqueJanuary 30, 20263 Mins Read
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Ranchi (Jharkhand): प्रत्येक वर्ष 30 जनवरी को पूरे विश्व में विश्व एनटीडी दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य नेग्लेक्टेड ट्रॉपिकल डिजीज़ (एनटीडी) के उन्मूलन के लिए वैश्विक स्तर पर जन- आंदोलन के रूप में प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करना है। इसी क्रम में राज्य में भी विश्व एनटीडी दिवस मनाया गया तथा लोगों को इन रोगों के प्रति जागरूक किया गया। वर्ष 2020 में पहली बार विश्व को इन बीमारियों से मुक्त करने के संकल्प के साथ विश्व एनटीडी दिवस मनाया गया था।

इस खबर को भी पढ़ें : छत्तीसगढ़: हाथीपांव से मुक्ति की पहल, 10 फरवरी से एमडीए में 1.58 करोड़ को दवा

राज्य के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बताया कि एनटीडी ऐसे रोगों का समूह है, जो मुख्यतः गरीब एवं वंचित आबादी को प्रभावित करते हैं। इनमें हाथीपांव (लिम्फैटिक फाइलेरिया), कालाजार (विसेरल लीशमैनियासिस), कुष्ठ रोग (लेप्रोसी), डेंगू, चिकुनगुनिया, सर्प-दंश तथा रेबीज़ जैसे रोग शामिल हैं। ये सभी रोग पूरी तरह से रोके जा सकते हैं, इसके बावजूद हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग इनसे प्रभावित होते हैं। भारत में भी हजारों लोग एनटीडी से संक्रमित होकर जीवनभर असहनीय पीड़ा झेलते हैं, कई बार दिव्यांगता का शिकार हो जाते हैं, जिससे उनकी आजीविका, आर्थिक स्थिति और सामाजिक जीवन पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि भारत विश्व स्तर पर लगभग प्रत्येक प्रमुख एनटीडी से सर्वाधिक प्रभावित देशों में शामिल है। ये रोग न केवल स्वास्थ्य बल्कि शिक्षा, पोषण और आर्थिक विकास को भी बुरी तरह प्रभावित करते हैं। हालांकि, इन रोगों की रोकथाम एवं उन्मूलन पूरी तरह संभव है। राज्य सरकार एनटीडी के उन्मूलन के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है और इससे संबंधित सभी गतिविधियों को मिशन मोड में संचालित किया जा रहा है।

राज्य के वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. बीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि एनटीडी के अंतर्गत आने वाले अधिकांश रोग राज्य के लिए ‘नेग्लेक्टेड’ नहीं हैं, इसी कारण राज्य सरकार इनके उन्मूलन को उच्च प्राथमिकता पर लेकर कार्य कर रही है। इसके सकारात्मक परिणामस्वरूप वर्तमान में राज्य का केवल एक प्रखंड — पाकुड़ जिले का लिट्टीपाड़ा — कालाजार से प्रभावित रह गया है।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि राज्य सरकार के दिशा- निर्देशों एवं प्रतिबद्धता के अनुरूप फाइलेरिया जैसे प्रमुख एनटीडी रोग के उन्मूलन हेतु राज्य से लेकर ग्राम स्तर तक सतत प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में आगामी 10 फरवरी से मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कार्यक्रम प्रारंभ किया जाएगा।

इस खबर को भी पढ़ें : हाथीपांव और कालाजार मुक्त बनेगा मध्य प्रदेश; स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की व्यापक तैयारी

इस कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य के 14 जिलों — बोकारो, देवघर, धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, गढ़वा, गिरिडीह, गुमला, कोडरमा, लोहरदगा, पाकुड़, रामगढ़, रांची, साहिबगंज एवं सिमडेगा — के 87 चिन्हित प्रखंडों के 14,496 गांवों में लगभग 1 करोड़ 75 लाख लाभुकों को दवा प्रशासकों द्वारा अपने सामने फाइलेरिया-रोधी दवाएं खिलाई जाएंगी।

हमें पूर्ण विश्वास है कि जिस प्रकार राज्य कालाजार के उन्मूलन की दिशा में निर्णायक रूप से अग्रसर है, उसी प्रकार अंतर-विभागीय समन्वय, सामुदायिक सहभागिता तथा सुदृढ़ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच दूर- दराज़ क्षेत्रों तक सुनिश्चित कर राज्य को शीघ्र ही फाइलेरिया एवं अन्य सभी एनटीडी रोगों से मुक्त कराया जाएगा।

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