Ranchi: झारखंड में कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने और प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सीएम हेमंत सोरेन ने एक बेहद बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। राज्य के दागी, लापरवाह और भ्रष्टाचार में लिप्त पुलिस अफसरों पर अब बहुत जल्द बड़ी गाज गिरने वाली है। सीएम के सीधे निर्देश के बाद पुलिस मुख्यालय ऐसे दागदार अधिकारियों की पूरी ‘कुंडली’ (गोपनीय रिपोर्ट) तैयार कर रहा है। सरकार की नई रणनीति के तहत अब ऐसे किसी भी पदाधिकारी को थानों या फील्ड में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं सौंपी जाएगी। इस बड़े प्रशासनिक बदलाव और शुद्धिकरण अभियान की शुरुआत सीधे पुलिस विभाग से की जा रही है।

थानेदारों और जूनियर अफसरों पर विशेष नजर

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस विशेष अभियान के तहत खासकर थानों के प्रभारियों (थानेदारों) और जूनियर पुलिस अधिकारियों की एक विस्तृत और गोपनीय सूची तैयार की जा रही है। इस ब्लैक लिस्ट में उन पदाधिकारियों के नाम प्रमुखता से शामिल किए जा रहे हैं जो अपने कर्तव्यों के प्रति बिल्कुल भी गंभीर नहीं हैं, जिनकी लापरवाही और सुस्ती की वजह से विभिन्न थानों में हजारों आपराधिक मामले (केस) महीनों से पेंडिंग पड़े हुए हैं। पुलिस मुख्यालय स्तर पर इन सभी संदिग्ध और सुस्त अधिकारियों की गोपनीय कार्यशैली की रिपोर्ट जिला कप्तानों से मांगी जा रही है।

बोकारो और चतरा के मामलों ने बढ़ाई सरकार की सख्ती

हाल के दिनों में राज्य के कुछ जिलों से पुलिसिया लापरवाही और घूसखोरी के बेहद शर्मनाक मामले सामने आए थे, जिसने सरकार को यह कड़ा फैसला लेने पर मजबूर किया:

  • बोकारो का अपहरण कांड: पिछले दिनों बोकारो जिले में एक छात्रा के अपहरण के संवेदनशील मामले में स्थानीय थानेदार अभिषेक रंजन और केस के अनुसंधानकर्ता (IO) अनिकेत कुमार पर लापरवाही के बेहद गंभीर आरोप लगे थे। इस मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने भी कड़ा संज्ञान लेते हुए पुलिस प्रशासन को फटकार लगाई थी, जिसके बाद तत्कालीन कार्रवाई के तहत पूरे थाने के 28 पुलिसकर्मियों को एक साथ सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया था।

  • चतरा का रिश्वत कांड: इसी तरह चतरा जिले से भी एक ऑडियो क्लिप वायरल हुई थी, जिसमें एक सड़क दुर्घटना मामले में केस (FIR) दर्ज करने के एवज में पीड़ित से ₹30,000 की मोटी रिश्वत मांगी जा रही थी। इस मामले में भी सत्यता पाए जाने पर संबंधित थानेदार और सब-इंस्पेक्टर को सस्पेंड किया गया था।

अब नहीं मिलेगी मलाईदार पोस्टिंग, भेजे जाएंगे सेंटिंग पोस्ट पर

झारखंड में पुलिसकर्मियों द्वारा रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े जाने की लगातार आ रही शिकायतों को सीएम ने बेहद गंभीरता से लिया है। सरकार ने नीतिगत फैसला कर लिया है कि भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे अफसरों को किसी भी कीमत पर जनता से सीधे जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर नहीं बिठाया जाएगा।

गौरतलब है कि पूर्व में कई बार ऐसे मौके आए थे जब भ्रष्टाचार या लापरवाही के मामले में सस्पेंड होने वाले पुलिसकर्मियों को बहाल होने के बाद दोबारा मलाईदार और महत्वपूर्ण पदों पर पदस्थ कर दिया जाता था, लेकिन अब इस परिपाटी को पूरी तरह बंद किया जा रहा है। अब से जितने भी गैर-जिम्मेदार, भ्रष्ट और लापरवाह पुलिस अफसर चिन्हित होंगे, उन्हें मुख्यधारा से हटाकर सीधे गैर-महत्वपूर्ण इकाइयों और ‘सेंटिंग पोस्ट’ (लूप लाइन) पर भेज दिया जाएगा। आने वाले दिनों में जब राज्य में बड़े पैमाने पर पुलिस कप्तानों और थानेदारों के तबादले (Transfer-Postings) होंगे, तब इस सूची का बड़ा असर देखने को मिलेगा।

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