रांची: पश्चिम एशिया (गल्फ रीजन) में 28 फरवरी से शुरू हुए भीषण सैन्य टकराव ने वहां रह रहे लाखों भारतीयों की नींद उड़ा दी है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस बिगड़ते हालात पर गहरी चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की अपील की है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से अनुरोध किया है कि खाड़ी क्षेत्र में असुरक्षित महसूस कर रहे झारखंडवासियों और अन्य भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाने के लिए तत्काल ‘इवेक्युएशन’ (निकासी) योजना बनाई जाए।

झारखंड सरकार ने कसी कमर

सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए मुख्यमंत्री ने न केवल केंद्र से मदद मांगी, बल्कि राज्य के नागरिकों को यह भरोसा भी दिलाया कि झारखंड सरकार उनकी सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठा रही है। राज्य सरकार ने ‘झारखंड स्टेट माइग्रेंट कंट्रोल रूम’ को अलर्ट मोड पर डाल दिया है। मुख्यमंत्री ने वहां फंसे लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और किसी भी आपात स्थिति में सीधे राज्य सरकार के कंट्रोल रूम से संपर्क करें।

मदद के लिए जारी हुए हेल्पलाइन नंबर

झारखंड के प्रवासी श्रमिक, छात्र या अन्य नागरिक जो इस समय खाड़ी देशों में हैं, वे इन नंबरों पर अपनी जानकारी दे सकते हैं:

  • टोल-फ्री हेल्पलाइन: 1800-3456-526

  • व्हाट्सएप नंबर: 9470132591, 9431336472

  • लैंडलाइन: 0651-2480083, 0651-2481188

क्यों गहराया संकट?

गौरतलब है कि हाल के दिनों में खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों में तेजी आई है, जिससे हवाई क्षेत्र (Airspace) बाधित हुआ है। दुबई और कतर जैसे प्रमुख केंद्रों पर फंसे झारखंड के लोग अब सुरक्षित घर लौटने का इंतजार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने भारतीय दूतावासों से भी समन्वय बढ़ाने की बात कही है ताकि ग्राउंड जीरो पर प्रवासियों को भोजन और आश्रय की कमी न हो।

हेमंत सोरेन ने अपने संदेश में यह भी कहा कि भारत एक राष्ट्र के रूप में अपने नागरिकों के साथ चट्टान की तरह खड़ा है और राज्य सरकार केंद्र के साथ मिलकर इस ‘रेस्क्यू ऑपरेशन’ में हर संभव सहयोग के लिए तैयार है।

Share.
Exit mobile version