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झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा पर संकट; भूखे पेट जान बचा रहे कर्मचारी!

Ranchi News: झारखंड की जीवन रेखा मानी जाने वाली 108 एंबुलेंस सेवा खुद ‘बीमार’ हो गई है। राज्य भर के एंबुलेंस कर्मियों ने सेवा संचालित करने वाली निजी एजेंसी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 108 एंबुलेंस कर्मचारी संघ का आरोप है कि उन्हें कई

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Ranchi News: झारखंड की जीवन रेखा मानी जाने वाली 108 एंबुलेंस सेवा खुद ‘बीमार’ हो गई है। राज्य भर के एंबुलेंस कर्मियों ने सेवा संचालित करने वाली निजी एजेंसी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 108 एंबुलेंस कर्मचारी संघ का आरोप है कि उन्हें कई महीनों से वेतन नहीं दिया गया है, जिससे उनके घरों में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे ये कर्मचारी अब सड़क पर उतरने को मजबूर हैं।

18 घंटे का ‘टॉर्चर’ और नौकरी छीनने का डर

कर्मचारियों ने एजेंसी पर बंधुआ मजदूरी कराने का गंभीर आरोप लगाया है। संघ के नेताओं का कहना है कि उनसे लगातार 18-18 घंटे ड्यूटी ली जा रही है। हैरानी की बात यह है कि इस अतिरिक्त काम के लिए न तो कोई ‘ओवरटाइम’ दिया जाता है और न ही साप्ताहिक अवकाश। जब कोई कर्मचारी अपनी आवाज उठाता है, तो उसे सीधे तौर पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है।

वेतन नहीं मिला तो ठप हो सकती है सेवा

एजेंसी की इस मनमानी और प्रताड़ना के कारण कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही बकाया वेतन का भुगतान नहीं किया गया और कार्य समय में सुधार नहीं हुआ, तो वे एंबुलेंस के पहिये थाम देंगे। अगर ऐसा हुआ तो झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा सकती है और आपातकालीन मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाएगी। अब सबकी नजरें स्वास्थ्य विभाग पर टिकी हैं कि वह इस शोषण को रोकने के लिए क्या कदम उठाता है।

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