डॉक्टर के अभाव में चैनपुर CHC की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
चैनपुर (गुमला): चैनपुर–गुमला मुख्य मार्ग पर प्रेमनगर संत अन्न बालिका उच्च विद्यालय के समीप हुई भीषण सड़क दुर्घटना में एक उदीयमान हॉकी खिलाड़ी की मौत हो गई, जबकि दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हादसे ने न सिर्फ एक होनहार खिलाड़ी की जिंदगी छीन ली, बल्कि चैनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) की लचर और गैर-जवाबदेह स्वास्थ्य व्यवस्था को भी पूरी तरह उजागर कर दिया।
मृतक की पहचान 22 वर्षीय संजीत टोप्पो, पिता क्लेमेंट टोप्पो उर्फ पैगरा के रूप में हुई है। घायल युवकों में बिमल लकड़ा (25) और सुजीत टोप्पो (22) शामिल हैं, जिन्हें गंभीर हालत में सदर अस्पताल गुमला रेफर किया गया है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तीनों युवक एनएस बाइक (जेएच-09-एएन-5799) पर सवार होकर चैनपुर से छतरपुर की ओर जा रहे थे। बाइक की रफ्तार काफी तेज थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि युवक नशे की हालत में थे और किसी ने भी हेलमेट नहीं पहन रखा था। प्रेमनगर के पास सड़क के तीखे मोड़ पर बाइक अनियंत्रित हो गई और तीनों सड़क पर गिर पड़े। संजीत टोप्पो के सिर और शरीर में गंभीर चोटें आईं।
हादसे के तुरंत बाद आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और मानवीय पहल दिखाते हुए तीनों घायलों को निजी वाहनों से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चैनपुर पहुंचाया। लेकिन अस्पताल पहुंचते ही स्थिति और भयावह हो गई। अस्पताल में कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं था, जिससे घायल युवक लंबे समय तक तड़पते रहे और परिजन मदद के लिए इधर-उधर भटकते रहे।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि चैनपुर CHC में 24 घंटे डॉक्टर उपलब्ध रहने का दावा किया जाता है, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। आपात स्थिति में भी अस्पताल में डॉक्टर की अनुपस्थिति आम बात बन चुकी है। इसी लापरवाही के कारण संजीत टोप्पो की जान चली गई।
पूर्व उप प्रमुख अनूप संजय टोप्पो ने घटना पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि समय पर डॉक्टर उपलब्ध होते, तो शायद एक युवा खिलाड़ी की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कागजों में व्यवस्थाएं दुरुस्त दिखाई जाती हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है। उन्होंने पूर्व चिकित्सक डॉ. धर्मनाथ ठाकुर के कार्यकाल की सराहना करते हुए वर्तमान व्यवस्था को पूरी तरह असफल बताया।
जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि रोस्टर के अनुसार डॉ. दीपशिखा किंडो छुट्टी पर थीं और उनके स्थान पर डॉ. प्रभात कुमार गौतम की ड्यूटी निर्धारित थी। इसके बावजूद डॉ. गौतम शाम करीब पांच बजे ही गुमला निकल गए, जबकि किसी वैकल्पिक डॉक्टर की कोई व्यवस्था नहीं की गई। उन्होंने बताया कि इस गंभीर लापरवाही की सूचना देने के लिए उपायुक्त से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। बाद में सिविल सर्जन को घटना से अवगत कराया गया।
करीब रात 11 बजे, हादसे के कई घंटे बाद डॉ. प्रभात कुमार गौतम गुमला से चैनपुर पहुंचे और जांच के बाद संजीत टोप्पो को मृत घोषित किया। इस देरी ने लोगों के आक्रोश को और भड़का दिया। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्राथमिक उपचार मिल जाता, तो शायद संजीत की जान बचाई जा सकती थी।
मीडिया से बातचीत में डॉ. प्रभात कुमार गौतम ने सफाई देते हुए कहा कि उन्हें अगले दिन सुबह रांची बुलाया गया था और अस्पताल परिसर में आवास की साफ-सफाई की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण वे वहां नहीं रुकते हैं। हालांकि इस बयान से लोगों में और नाराजगी देखी गई। ग्रामीणों का कहना है कि व्यक्तिगत असुविधा किसी मरीज की जान से बड़ी नहीं हो सकती।
रामपुर पंचायत के मुखिया दीपक खलखो ने कहा कि चैनपुर CHC में डॉक्टरों और कर्मियों की अनुपस्थिति अब आम समस्या बन चुकी है। अस्पताल प्रबंधन न तो ड्यूटी की सख्ती से निगरानी करता है और न ही आपात सेवाओं को गंभीरता से लेता है। जब तक जिम्मेदार अधिकारियों और प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं।
संजीत टोप्पो की मौत से गांव और खेल जगत में शोक की लहर है। एक उभरते हुए हॉकी खिलाड़ी का इस तरह असमय जाना पूरे क्षेत्र के लिए बड़ी क्षति है। परिजन और ग्रामीण अब सिर्फ शोक नहीं, बल्कि जवाबदेही और ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
यह घटना केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता का प्रतीक बन गई है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या चैनपुर CHC की व्यवस्था में सुधार के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।



