Ranchi : संथाल परगना प्रमंडल में पिछले लगभग 50 वर्षों से लंबित सर्वे-सेटलमेंट का मुद्दा एक बार फिर सदन में गूंजा। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन झामुमो विधायक हेमलाल मुर्मू ने ध्यानाकर्षण सूचना के तहत इस महत्वपूर्ण विषय को उठाते हुए बताया कि संथाल परगना में 1973 से सर्वे-सेटलमेंट का कार्य चल रहा है, लेकिन आज तक यह पूरा नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि प्रमंडल के कुल 12,273 गांवों में सर्वे होना है, जबकि लगभग पांच दशकों में केवल 687 गांवों का ही सर्वे पूरा हो पाया है। शेष 11,586 गांव अब भी लंबित हैं, जो प्रशासनिक स्थिति पर सवाल खड़े करते हैं।
विधायक मुर्मू ने कहा कि इतने विशाल क्षेत्र में सर्वे जैसे महत्वपूर्ण कार्य को अंजाम देने के लिए भारी मात्रा में मानव संसाधन की जरूरत है, लेकिन वर्तमान में 25 सहायक बंदोबस्त पदाधिकारियों की जगह केवल दो अधिकारियों के सहारे काम चल रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि अतिरिक्त सहायक बंदोबस्त पदाधिकारियों की नियुक्ति की जाए, ताकि सर्वे का काम तेजी से आगे बढ़ सके। उन्होंने कहा कि सर्वे-सेटलमेंट के पूरा न होने से ग्रामीणों को जमीन संबंधी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
जवाब में भू-राजस्व मंत्री दीपक बिरूआ ने माना कि मानव संसाधन की कमी इस कार्य में सबसे बड़ी बाधा है। उन्होंने बताया कि संथाल परगना ही नहीं, राज्य के अन्य प्रमंडलों में भी सर्वे-सेटलमेंट का काम काफी पीछे चल रहा है। मंत्री ने जानकारी दी कि सीआई की परीक्षा का परिणाम जल्द जारी होगा, जिससे कुछ पदों पर नियुक्ति संभव होगी। इसके अलावा कुछ पदों को प्रोन्नति के माध्यम से भी भरा जाएगा, जिससे सर्वे कार्य में राहत मिलेगी।
मंत्री बिरूआ ने बताया कि सर्वे कार्य में आधुनिक तकनीक का उपयोग करने का प्रयास भी किया गया है। सर्वे टीम केरल और कर्नाटक जाकर आधुनिक सर्वे पद्धतियों, विशेषकर ड्रोन तकनीक का अध्ययन कर चुकी है। झारखंड में भी ड्रोन की मदद से सर्वे शुरू किया गया था, लेकिन कई जगह ग्रामीणों के विरोध के कारण इसे रोक देना पड़ा। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द अतिरिक्त सहायक बंदोबस्त पदाधिकारियों की नियुक्ति करेगी, ताकि संथाल परगना में इस लंबे समय से लंबित काम को गति दी जा सके और इसे समय पर पूरा किया जा सके।



