World News: मध्य पूर्व में रविवार की सुबह एक बार फिर तनाव भरे माहौल के साथ शुरू हुई। इजराइल ने दावा किया कि उसने बेरुत के दिल में हवाई हमला किया और हिजबुल्लाह के शीर्ष नेता हयथम अली तबाताबाई को मार गिराया। चौंकाने वाली बात यह है कि यह हमला उस समय हुआ जब दोनों पक्षों के बीच आधिकारिक रूप से सीजफायर चल रहा था। लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है—इजराइल ने युद्धविराम के बीच यह जोखिम भरा कदम क्यों उठाया?

इजराइल ने क्यों किया हमला?

इजराइली सेना ने साफ कहा कि यह टारगेटेड स्ट्राइक थी और तबाताबाई को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह रेडवान यूनिट की कमान संभाल रहा था। यही यूनिट इजराइल के खिलाफ सीमा पार हमलों की रणनीति तैयार करने के लिए कुख्यात है। इजराइली प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक हमला सिर्फ एक व्यक्ति के लिए था, लेकिन यह कार्रवाई बेइरुत जैसे घनी आबादी वाले इलाके में हुई, जिससे विवाद और बढ़ गया।

कौन था तबाताबाई?

तबाताबाई की कहानी किसी फिल्म जैसी है।
1968 में बेरुत में जन्मा यह कमांडर 12 साल की उम्र में हिजबुल्लाह से जुड़ गया था। उसकी मां दक्षिण लेबनान और पिता ईरान से थे, और यही वजह थी कि वह ईरान और लेबनान के रिश्तों की कड़ी माना जाता था।
2015 में भी इजराइल ने उस पर हमला किया था, लेकिन वह बच निकला था।
साल 2024 के अंत में संगठन के कई बड़े नेताओं की मौत के बाद वह दूसरे नंबर पर पहुंच गया।
अमेरिका ने 2016 में उस पर 45 करोड़ रुपये का इनाम रखा था।

हिजबुल्लाह की नाराज़गी और इलाके में तनाव

हिजबुल्लाह ने हमले की पुष्टि तो कर दी, लेकिन मारे गए व्यक्ति का नाम उजागर नहीं किया। उनका कहना है कि यह हमला “नई रेड लाइन” पार करता है। संगठन के सांसद अली अम्मार ने यह भी आरोप लगाया कि इजराइल ने रिहायशी इलाके को निशाना बनाया, जहां कोई सैन्य गतिविधि नहीं थी। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक इस हमले में पांच लोगों की मौत हुई और 28 लोग घायल हुए हैं।
बेरुत में कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और लोग खौफ के माहौल में हैं।

अब आगे क्या?

यह हमला सीजफायर को और कमजोर कर सकता है। मध्य पूर्व के जानकार मान रहे हैं कि आने वाले दिनों में हिजबुल्लाह की प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। हालात किस दिशा में जाएंगे, यह आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि यह हमला क्षेत्र को एक बार फिर अस्थिर कर गया है।

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