Jerusalem, (Israel): इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच कई दिनों से जारी तनाव और हिंसक झड़पों के बीच राहत की खबर सामने आई है। दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम को लेकर सहमति बन गई है, जिससे क्षेत्र में हालात सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है। हालांकि सुरक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर दोनों पक्ष अभी भी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
इजरायली अधिकारियों के हवाले से स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि युद्धविराम समझौते पर सहमति बन गई है। हालांकि इजरायल ने स्पष्ट किया है कि वह दक्षिणी लेबनान में बनाए गए अपने सुरक्षा क्षेत्र (सिक्योरिटी जोन) में मौजूद रहेगा और किसी भी हमले का जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखेगा।
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इजरायल के एक अधिकारी ने कहा कि यदि उन पर हमला किया गया तो सेना जवाबी कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेगी। इस बयान से साफ है कि युद्धविराम के बावजूद सुरक्षा को लेकर इजरायल कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है। दूसरी ओर, हिज्बुल्लाह के संसदीय गुट “लॉयल्टी टू द रेजिस्टेंस” के सदस्य इब्राहिम अल-मौसावी ने कहा कि उनका संगठन युद्धविराम समझौते का सम्मान करेगा, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि इजरायल भी समझौते की सभी शर्तों का पालन करे।
इससे पहले हालात उस समय और गंभीर हो गए थे जब लेबनान में हुए हमले में चार इजरायली सैनिकों की मौत हो गई थी। इसके बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हिज्बुल्लाह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया था। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में नेतन्याहू ने कहा कि हिज्बुल्लाह द्वारा किया गया हमला युद्धविराम का खुला उल्लंघन था। इसके जवाब में इजरायली रक्षा बल (आईडीएफ) ने दक्षिणी लेबनान और बेका घाटी में बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की।
इजरायली सेना के अनुसार, इस अभियान के दौरान 80 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया गया और कई लड़ाकों को मार गिराया गया। इसके अलावा बेका घाटी में हिज्बुल्लाह के कमांड सेंटरों पर भी हमले किए गए। नेतन्याहू ने रक्षा मंत्री और सेना प्रमुख के साथ सुरक्षा हालात की समीक्षा करते हुए दोहराया कि इजरायल अपने सैनिकों या अपनी भूमि पर किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी भी उकसावे की स्थिति में कड़ी प्रतिक्रिया दी जाएगी।
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हालांकि युद्धविराम समझौते से क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीद जगी है, लेकिन हालिया घटनाओं को देखते हुए मध्य पूर्व में स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी दोनों पक्षों से संयम बरतने और समझौते का सम्मान करने की अपील कर रहा है।
